उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड का अस्तित्व समाप्त: आज से अल्पसंख्यक शिक्षण प्राधिकरण संभालेगा कमान, लागू होगा NCERT पाठ्यक्रम
📍 देहरादून | The Bharat Pulse
उत्तराखंड में 1 जुलाई 2026 से मदरसा शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव लागू हो गया है। राज्य सरकार के आदेश के अनुसार 30 जून 2026 को उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया है। अब राज्य के सभी मान्यता प्राप्त मदरसों की मान्यता, निगरानी, पाठ्यक्रम और प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन नवगठित ‘राज्य अल्पसंख्यक शिक्षण प्राधिकरण’ करेगा।
🏛️ देश का पहला राज्य बना उत्तराखंड
उत्तराखंड ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है, जहां मदरसा शिक्षा व्यवस्था का पूरा प्रशासनिक ढांचा बदल दिया गया है। सरकार का कहना है कि अब मदरसों को केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें आधुनिक और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जाएगा।
📖 क्या-क्या होंगे बड़े बदलाव?
✅ NCERT पाठ्यक्रम अनिवार्य
अब मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ NCERT आधारित पाठ्यक्रम भी पढ़ाया जाएगा।
🧪 विज्ञान, गणित और कंप्यूटर की पढ़ाई
छात्रों को अब Science, Mathematics और Computer Education की भी अनिवार्य शिक्षा मिलेगी।
🏫 स्कूलों जैसे नियम होंगे लागू
अब मदरसों पर भी वही नियम लागू होंगे जो सामान्य स्कूलों पर लागू होते हैं। निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
⚠️ 500 गैर-पंजीकृत मदरसों पर संकट
राज्य में करीब 500 ऐसे मदरसे संचालित हो रहे हैं, जो बिना सरकारी मान्यता के चल रहे हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन मदरसों पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है।
👨🎓 60 से 70 हजार छात्रों पर पड़ेगा असर
उत्तराखंड के मदरसों में वर्तमान में करीब 60,000 से 70,000 छात्र अध्ययनरत हैं। नई नीति लागू होने के बाद इन छात्रों को धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक एवं राष्ट्रीय स्तर की स्कूली शिक्षा भी प्राप्त होगी।
📌 सरकार ने सभी मान्यता प्राप्त मदरसों को नए नियमों और मानकों के अनुरूप स्वयं को ढालने के निर्देश जारी कर दिए हैं।