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गंगोत्री विधानसभा में भाजपा टिकट को लेकर सरगर्मियां तेज, राजदीप परमार समेत कई दावेदार मैदान में

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उत्तरकाशी। उत्तराखंड की राजनीति में गंगोत्री विधानसभा का विशेष महत्व माना जाता है। राजनीतिक गलियारों में वर्षों से यह चर्चा होती रही है कि जिस दल का विधायक गंगोत्री से जीतकर आता है, प्रदेश में सरकार उसी दल की बनती है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के भीतर टिकट की दौड़ तेज हो गई है और कई दावेदार क्षेत्र में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।

इन दावेदारों में सबसे अधिक चर्चा डुण्डा ब्लॉक प्रमुख राजदीप परमार की हो रही है। युवा, ऊर्जावान और सक्रिय नेता के रूप में उभर रहे राजदीप परमार ने पिछले कुछ समय में विधानसभा क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। उत्तरकाशी में अपनी सक्रिय राजनीतिक उपस्थिति बढ़ाने के साथ-साथ वे गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क साध रहे हैं। सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी निरंतर भागीदारी ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाया है। समर्थकों का दावा है कि भाजपा के विभिन्न आंतरिक फीडबैक और सर्वेक्षणों में भी उनकी स्थिति मजबूत बताई जा रही है। साफ-सुथरी छवि और संगठनात्मक सक्रियता उन्हें युवा नेतृत्व के प्रमुख चेहरे के रूप में स्थापित कर रही है।

वर्तमान विधायक सुरेश चौहान भी टिकट के प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। उनकी पहचान एक सरल, सहज और ईमानदार नेता के रूप में है। हालांकि क्षेत्र में यह चर्चा भी सुनने को मिलती है कि उनके कार्यकाल में गंगोत्री विधानसभा को अपेक्षित बड़े विकास कार्य नहीं मिल पाए। गंगोत्री हाईवे की बदहाल स्थिति, संपर्क मार्गों की समस्याएं, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दे विपक्ष के साथ-साथ स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसके बावजूद संगठन में उनकी स्वीकार्यता और पार्टी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें मजबूत दावेदार बनाए हुए है।

पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण भी टिकट की दौड़ में महत्वपूर्ण नाम हैं। दो बार विधायक रह चुके सजवाण का राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में लंबे समय से बना जनसंपर्क उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। उनके समर्थक दावा करते हैं कि आज भी विधानसभा के अधिकांश गांवों में उनकी पकड़ बनी हुई है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद उनका प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा। बावजूद इसके उनकी राजनीतिक समझ और अनुभव उन्हें इस मुकाबले में मजबूत बनाए हुए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के करीबी माने जाने वाले और भाजपा के गढ़वाल संयोजक किशोर भट्ट भी टिकट के लिए गंभीर दावेदारी कर रहे हैं। संगठन और सरकार में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है, लेकिन उनके बारे में क्षेत्र में एक धारणा लंबे समय से चर्चा में है कि वे आम लोगों और कार्यकर्ताओं के फोन कम उठाते हैं तथा जनसामान्य के कामों में अपेक्षित रुचि नहीं लेते। दिलचस्प बात यह है कि यह बात उनके कुछ समर्थक भी स्वीकार करते हैं, जबकि विरोधी इसी मुद्दे को उनके खिलाफ प्रमुख हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले नगर पालिका चुनाव में हार के बाद किशोर भट्ट ने अपनी सक्रियता बढ़ाई है और वे लगातार सामाजिक, धार्मिक और पारिवारिक कार्यक्रमों में भाग लेकर जनता के बीच पहुंच बनाने का प्रयास कर रहे हैं। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती इसी धारणा को बदलने की है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गंगोत्री विधानसभा में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसी एक चेहरे का चयन नहीं, बल्कि सभी दावेदारों के बीच संतुलन बनाए रखना होगी। प्रत्येक दावेदार का अपना समर्थक वर्ग और राजनीतिक प्रभाव है। ऐसे में टिकट वितरण के बाद पार्टी की एकजुटता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

फिलहाल गंगोत्री विधानसभा में भाजपा की टिकट को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन यह स्पष्ट है कि पुराने अनुभव और नए नेतृत्व के बीच मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। इस बीच राजदीप परमार ने अपनी सक्रियता, जनसंपर्क और युवा छवि के बल पर स्वयं को इस दौड़ के प्रमुख चेहरों में शामिल कर लिया है।

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