अयोध्या राम मंदिर विवाद में नया मोड़: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा निर्मोही अखाड़ा
अयोध्या: राम मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम Court के 2019 के फैसले के बाद निर्मोही अखाड़े ने शीर्ष अदालत में नई याचिका दाखिल की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया और केंद्र सरकार द्वारा गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन एवं कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
🛕 ट्रस्ट के गठन पर सवाल
निर्मोही अखाड़े का कहना है कि ट्रस्ट में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है जिनका राम जन्मभूमि आंदोलन या मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था से कोई सीधा संबंध नहीं रहा। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि कुछ ट्रस्ट सदस्यों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, जिससे मंदिर की छवि और श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित हुई है।
📜 क्या हैं प्रमुख मांगें?
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से कई अहम मांगें की गई हैं—
- ✅ श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाए।
- ✅ निर्मोही अखाड़े को ट्रस्ट में उचित प्रतिनिधित्व और निर्णय लेने की भूमिका दी जाए।
- ✅ मंदिर में पूजा-अर्चना रामानंदी बैरागी संप्रदाय की पारंपरिक पद्धति से कराई जाए।
- ✅ श्री रामलला विराजमान की मूल मूर्तियों को पुनः स्थापित करने का निर्देश दिया जाए।
- ✅ वर्ष 2019 से अब तक ट्रस्ट के सभी वित्तीय लेन-देन का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
- ✅ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र समिति और निगरानी बोर्ड का गठन किया जाए।
💰 फोरेंसिक ऑडिट की मांग
निर्मोही अखाड़े ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच आवश्यक है। इसी कारण सभी आर्थिक गतिविधियों का फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है।
🚔 चढ़ावा चोरी मामले की जांच जारी
इसी बीच राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला भी चर्चा में है। इस मामले की जांच एसआईटी (SIT) कर रही है। पुलिस अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उसके भतीजे मनीष यादव से पुलिस रिमांड पर पूछताछ जारी है।
⚖️ अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर
निर्मोही अखाड़े की इस नई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि अदालत याचिका स्वीकार करती है, तो राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रबंधन को लेकर नई कानूनी बहस शुरू हो सकती है।