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रांची/नई दिल्ली। झारखंड भाजपा की मुख्य प्रवक्ता और अल्पसंख्यक समाज की प्रमुख महिला नेता राफिया नाज़ आज भाजपा के उभरते हुए मुस्लिम महिला चेहरों में गिनी जाती हैं। योग शिक्षिका, समाजसेवी और राजनीतिक प्रवक्ता के रूप में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। संघर्ष, साहस, सेवा और संकल्प से भरी उनकी जीवन यात्रा आज हजारों युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।

🧘‍♀️ बचपन से योग के प्रति लगाव

रांची की रहने वाली राफिया नाज़ को बचपन से ही योग में गहरी रुचि थी। मात्र चार वर्ष की आयु में उन्होंने योग सीखना शुरू कर दिया था। उनके माता-पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया और यही सहयोग आगे चलकर उनके जीवन की सबसे बड़ी ताकत बना। राफिया का मानना है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक संतुलन का माध्यम है।

🏆 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित

योग के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियां बेहद प्रभावशाली रही हैं। विभिन्न मंचों पर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार राफिया नाज़ को 45 राष्ट्रीय, 18 राज्य स्तरीय और 2 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्हें राजीव रत्न, योग प्रभा सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया है। उन्होंने देशभर में सैकड़ों योग शिविरों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लिया है।

🔥 विरोध और चुनौतियों के बीच बढ़ता सफर

 

राफिया नाज़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर उस समय चर्चा में आया जब उन्होंने योग गुरु बाबा रामदेव के साथ मंच साझा किया। इसके बाद उन्हें योग को लेकर कुछ कट्टरपंथी समूहों के विरोध का सामना करना पड़ा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उनके खिलाफ कथित फतवा जारी हुआ, उन्हें धमकियां मिलीं और उनके घर पर पथराव जैसी घटनाएं भी सामने आईं। लेकिन इन चुनौतियों ने उनके हौसले को कमजोर करने के बजाय और अधिक मजबूत बनाया।

राफिया कहती हैं कि असामाजिक तत्वों की धमकियों और हमलों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका विश्वास रहा कि योग समाज को जोड़ने, सकारात्मकता फैलाने और मानवता की सेवा का सबसे सशक्त माध्यम है। उनका प्रसिद्ध संदेश है— “योग न हिंदू है और न मुसलमान, योग केवल योग है।”

🌍 ‘Yoga Beyond Religion’ के जरिए सामाजिक बदलाव

 

वर्ष 2017 में उन्होंने “Yoga Beyond Religion” संस्था की स्थापना की। इस संस्था का उद्देश्य योग को गांव-गांव, गली-गली और समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है। संस्था के माध्यम से उन्होंने सैकड़ों बच्चों को योग सिखाया और उन्हें अनुशासन, स्वास्थ्य तथा सकारात्मक जीवन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

राफिया का मानना है कि योग बच्चों को केवल शारीरिक रूप से मजबूत नहीं बनाता, बल्कि उनके व्यक्तित्व का भी निर्माण करता है। उनके अनुसार आज का प्रशिक्षित और जागरूक बच्चा ही कल का जिम्मेदार नागरिक बनता है। इसी सोच के साथ उन्होंने अनाथालयों, स्कूलों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं में भी योग प्रशिक्षण दिया है।

💻 कोरोना काल में 2100 से अधिक बच्चों को सिखाया योग

 

कोरोना महामारी के दौरान जब पूरा देश लॉकडाउन की स्थिति में था, तब भी राफिया नाज़ ने अपने मिशन को नहीं रोका। उन्होंने ऑनलाइन योग प्रशिक्षण शुरू किया और 2100 से अधिक बच्चों को घर बैठे योग सिखाया। उनका मानना है कि कोरोना काल में योग ने लोगों के भीतर सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक संतुलन और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

🤝 इंसानियत और सेवा को मानती हैं सबसे बड़ा धर्म

राफिया नाज़ अक्सर पैगंबर मोहम्मद साहब की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहती हैं कि इंसानियत और सेवा सबसे बड़ा धर्म है। उनका मानना है कि यदि कोई व्यक्ति अपने पड़ोसी की मदद करता है और समाज के लिए सकारात्मक कार्य करता है, तो वही सच्ची इबादत है। इसी सोच के साथ उन्होंने योग को सेवा और समाज निर्माण का माध्यम बनाया।

🪷 योग से राजनीति तक का सफर

योग और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में पहचान बनाने के बाद राफिया नाज़ ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। भाजपा से जुड़ने के बाद उन्होंने संगठन में तेजी से अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2021 में उन्हें भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा, झारखंड का प्रदेश प्रवक्ता बनाया गया। बाद में वह झारखंड भाजपा की मुख्य प्रवक्ता के रूप में स्थापित हुईं और आज पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।

📢 राजनीति में मुखर आवाज

राजनीतिक जीवन में उन्होंने महिला सुरक्षा, महिला आयोग में नियुक्तियां, मंईयां सम्मान योजना, अल्पसंख्यक अधिकार, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर लगातार मुखर भूमिका निभाई है। उन्होंने कई बार राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और महिलाओं से जुड़े मामलों में जवाबदेही की मांग की।

🇮🇳 राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान

हाल के वर्षों में राफिया नाज़ ने भाजपा के राष्ट्रीय अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा मुस्लिम महिलाओं और युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए जिन चेहरों पर भरोसा कर रही है, उनमें राफिया नाज़ प्रमुख नामों में शामिल हैं।

संघर्ष से सफलता तक

दो भाइयों और दो बहनों में सबसे बड़ी राफिया नाज़ ने अपने जीवन से यह साबित किया है कि योग किसी धर्म या समुदाय की सीमाओं में बंधा नहीं है, बल्कि यह मानवता, स्वास्थ्य, संतुलन और शांति का सार्वभौमिक मार्ग है। संघर्षों, विरोध और चुनौतियों के बीच भी उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।

आज राफिया नाज़ केवल भाजपा की प्रवक्ता नहीं हैं, बल्कि साहस, आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और महिला नेतृत्व की एक सशक्त मिसाल बन चुकी हैं। योग से समाज सेवा और राजनीति से जनसेवा का उनका सफर उन्हें देश के उभरते हुए मुस्लिम महिला नेतृत्व की महत्वपूर्ण आवाज के रूप में स्थापित कर रहा है।

✍️ द भारत पल्स ब्यूरो

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