राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT के सामने कैशियर का बड़ा खुलासा, सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक आई सामने
📍अयोध्या: राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच तेज हो गई है। आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद विशेष जांच दल (SIT) अब काउंटिंग सेंटर में लंबे समय से तैनात कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है। इसी क्रम में एक कैशियर का बयान दर्ज किया गया, जिसने आरोपियों के साथ कई महीनों तक दान की गिनती की थी। पूछताछ के दौरान उसने सुरक्षा व्यवस्था और कैश काउंटिंग सिस्टम से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे किए।
🛕 दो शिफ्टों में होती थी दान की गिनती
कैशियर ने बताया कि उसकी नियुक्ति वर्ष 2025 में इंटरव्यू के माध्यम से हुई थी। काउंटिंग सेंटर में प्रतिदिन दो शिफ्टों में काम होता था। पहली शिफ्ट सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से शाम 8 बजे तक चलती थी।
🔒 सुरक्षा के थे कड़े इंतजाम
कैशियर के अनुसार, काउंटिंग सेंटर में प्रवेश से पहले कर्मचारियों की कई स्तरों पर जांच होती थी। मोबाइल फोन, पर्स, घड़ी, अंगूठी सहित सभी निजी सामान लॉकर में जमा कराए जाते थे और विशेष यूनिफॉर्म पहनना अनिवार्य था। दान पात्र (हुंडी) को छह अधिकृत अधिकारियों की मौजूदगी में खोला जाता था और सीलबंद नकदी को सीसीटीवी निगरानी वाले काउंटिंग रूम में लाया जाता था।
👥 आरोपियों पर कभी नहीं हुआ शक
कैशियर ने बताया कि गिरफ्तार अधिकांश आरोपी उसके साथ रोजाना दूसरी शिफ्ट में काम करते थे। उनका व्यवहार सामान्य था, इसलिए किसी को उन पर संदेह नहीं हुआ। उसने दावा किया कि आरोपी अनुकल्प अक्सर अपने परिवार की आर्थिक संपन्नता की बातें करता था, जबकि आरोपी टीनू यादव का मंदिर परिसर में अच्छा प्रभाव माना जाता था।
🎥 CCTV निगरानी में सामने आई बड़ी चूक
पूछताछ के दौरान कैशियर ने बताया कि जिस कर्मचारी की जिम्मेदारी सीसीटीवी मॉनिटरिंग रूम में बैठकर काउंटिंग सेंटर की निगरानी करना थी, वह कई बार अपनी सीट से अनुपस्थित रहता था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसी चूक का फायदा उठाकर कथित चोरी को अंजाम दिया गया होगा।
📑 सभी कर्मचारियों की हो रही प्रोफाइलिंग
SIT अब केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। जांच टीम काउंटिंग सेंटर से जुड़े करीब 50 कर्मचारियों, जिनमें बैंक कर्मी, ट्रस्ट के अधिकारी और सुपरवाइजर शामिल हैं, की विस्तृत प्रोफाइल तैयार कर रही है। साथ ही सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी चार्ट, उपस्थिति रिकॉर्ड और बैंक खातों की भी गहन जांच की जा रही है।
🔎 जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कथित तौर पर करोड़ों रुपये के चढ़ावे की चोरी लंबे समय तक कैसे होती रही और इसमें सिस्टम की कौन-कौन सी खामियां जिम्मेदार थीं।