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संविधान की विरासत से जुड़े योगिंदर सक्सेना का निधन

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चांदनी चौक के प्रतिष्ठित व्यापारी, संविधान के सुलेखकार प्रेम बिहारी नारायण रायज़दा के भतीजे थे योगिंदर सक्सेना
नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
भारत के संविधान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े एक महत्वपूर्ण नाम योगिंदर सक्सेना अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन की खबर से दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
योगिंदर सक्सेना, भारत के संविधान की मूल हस्तलिखित प्रति को लिखने वाले महान सुलेखकार प्रेम बिहारी नारायण रायज़दा (Prem Behari Narain Raizada) के भतीजे थे।

🏛️ चांदनी चौक के सम्मानित व्यापारी
योगिंदर सक्सेना दिल्ली के ऐतिहासिक चांदनी चौक क्षेत्र के एक मशहूर और सम्मानित व्यापारी के रूप में जाने जाते थे। व्यापारिक ईमानदारी, सरल स्वभाव और सामाजिक जुड़ाव के कारण उन्हें बाजार और समाज—दोनों जगह विशेष सम्मान प्राप्त था।
चांदनी चौक के व्यापारिक समुदाय में उनका नाम भरोसे और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था।

🤝 भाजपा के दिग्गज नेताओं से रहे घनिष्ठ संबंध
योगिंदर सक्सेना का राजनीतिक और सामाजिक दायरा भी बेहद प्रभावशाली रहा। वे भारतीय जनता पार्टी के कई बड़े नेताओं के करीबी मित्र रहे।
एक दौर में उनका उठना-बैठना और पारिवारिक संबंध वरिष्ठ भाजपा नेता विजय कुमार मल्होत्रा, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. अरुण जेटली सहित कई शीर्ष नेताओं से रहा।
राजनीति में सक्रिय भूमिका भले ही उनकी न रही हो, लेकिन विश्वास, विचार और मित्रता के स्तर पर वे भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व के बीच सम्मानित नाम थे।
✍️ संविधान की कला को जीवित रखने वाला परिवार
योगिंदर सक्सेना ने अपने चाचा प्रेम बिहारी नारायण रायज़दा की ऐतिहासिक भूमिका को सहेजने और सामने लाने का कार्य किया।
उन्होंने समय-समय पर मीडिया और शोधकर्ताओं को बताया कि किस तरह प्रेम बिहारी नारायण रायज़दा ने राष्ट्रसेवा के भाव से, बिना किसी पारिश्रमिक के, पूरे संविधान को अपने हाथों से लिखा—और उसे कानून के साथ-साथ कला का अमूल्य दस्तावेज़ बना दिया।


🖋️ प्रेम बिहारी नारायण रायज़दा: लेखनी जिसने इतिहास रचा
प्रेम बिहारी नारायण रायज़दा का नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
संविधान का हर अनुच्छेद उनके सुलेख से सुसज्जित है
उन्होंने इस ऐतिहासिक कार्य के लिए कोई पारिश्रमिक स्वीकार नहीं किया
यह कार्य उन्होंने राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण के साथ किया
योगिंदर सक्सेना इस विरासत के संवाहक थे, जिन्होंने इस योगदान को भुलाए जाने नहीं दिया।
🕊️ निधन से शोक की लहर
योगिंदर सक्सेना के निधन को संविधान की सांस्कृतिक स्मृति, दिल्ली के व्यापारिक समाज और राजनीतिक मित्रताओं के लिए एक अपूरणीय क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
उनके जाने से एक ऐसा व्यक्तित्व विदा हो गया, जिसने परदे के पीछे रहकर भी राष्ट्र की धरोहर से जुड़ी स्मृतियों को जीवित रखा।
📌 The Bharat Pulse विशेष टिप्पणी
योगिंदर सक्सेना का जीवन इस बात का उदाहरण है कि राष्ट्र की सेवा केवल पद से नहीं, स्मृतियों और समर्पण से भी की जाती है।”

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