उत्तराखंड में भू उपयोग उल्लंघन पर सरकार सख्त, अब तक 3 हेक्टेयर से अधिक भूमि राज्य में निहित
📍 देहरादून, 8 जुलाई 2025 –
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश में भूमि अधिनियमों के उल्लंघन पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य में भूमि क्रय की अनुमति के बावजूद भू उपयोग उल्लंघन के मामलों में तेजी से कार्रवाई की जा रही है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भू व्यवस्था और भूमि प्रबंधन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से उत्तराखंड में अब एक प्रभावी भू कानून लागू है, जिसके तहत कृषि और उद्यान भूमि की अनियंत्रित बिक्री पर पूर्णतः रोक लग गई है। भू अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन करने वालों पर लगातार कार्यवाही की जा रही है और व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, भू अधिनियम की धारा 154(4)(3) क के तहत राज्य में अब तक 532 भूमि क्रय अनुमतियाँ दी गई हैं, जिनमें से 88 मामलों में भू उपयोग उल्लंघन पाया गया है। इनमें से 42 प्रकरणों में धारा 166-167 के अंतर्गत वाद दायर किए जा चुके हैं।
वहीं, धारा 154(4)(3) ख के तहत दी गई 963 अनुमतियों में से 172 मामलों में उल्लंघन दर्ज हुआ है, जिनमें 112 वाद दायर किए गए हैं।
धारा 154(4)(1) क के अंतर्गत कुल 147 भू उपयोग उल्लंघन के मामलों में कार्यवाही चल रही है, जिसमें केवल देहरादून जिले में ही 77 में से 50 प्रकरणों पर कार्रवाई गतिमान है।
इसके अतिरिक्त, राज्य में अब तक कुल 3.006 हेक्टेयर भूमि सरकार में निहित की जा चुकी है। जिन प्रमुख प्रकरणों में भूमि को सरकार में समाहित किया गया है, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- 0.040 हे. – त्रिलोक ग्रामोद्योग सेवा समिति, कपकोट, बागेश्वर (मौन पालन हेतु)
- 1.653 हे. – एमएस स्टैण्डर्ड स्प्लिन्ट्स लि., रुद्रपुर, उधमसिंहनगर
- 0.555 हे. – सिलटोना कैंची धाम, नैनीताल (भावनी सिंह)
- 0.713 हे. – रैनाबाड़ी हेल्थ रिसोर्ट, कटारमल चौखुटिया, अल्मोड़ा
- 0.025 हे. – कोट्यूड़ा, अल्मोड़ा (प्रणव सिंह, पश्चिम बंगाल)
राज्य सरकार का यह अभियान संकेत देता है कि भू कानून के उल्लंघन के प्रति अब कोई ढील नहीं बरती जाएगी और भू-उपयोग के मामलों पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।