प्रौद्योगिकीराजनीतिराज्यराष्ट्रीय

मेहनत की लगाम थामे, सपनों की उड़ान – केदारनाथ में खच्चर चला कर बना IITian

Read Time:4 Minute, 57 Second

Uttarakhand

रुद्रप्रयाग/केदारनाथ – जब हौसले बुलंद हों और इरादे मजबूत, तो कोई भी बाधा मंजिल के रास्ते को रोक नहीं सकती। रुद्रप्रयाग जिले के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले अतुल कुमार ने इसी जज्बे को साबित करते हुए पूरे उत्तराखंड का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। केदारनाथ में खच्चर चलाकर परिवार का पेट पालने वाले अतुल ने IIT JAM 2025 की कठिन परीक्षा को न केवल पास किया, बल्कि उनका चयन देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT मद्रास में हुआ है।

सपनों को नहीं छोड़ा, हालातों से लड़ा

अतुल कुमार का जीवन संघर्षों की कहानी है। पिता की आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं था और परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि कई बार दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो जाता था। ऐसे समय में अतुल ने पढ़ाई और परिवार दोनों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई। केदारनाथ में तीर्थ यात्रियों के सामान ढोने का कार्य करने के लिए वे खच्चर चलाने लगे। पहाड़ों की कठिन चढ़ाई और मौसम की मार के बीच भी उन्होंने किताबों से नाता नहीं तोड़ा।

हर रोज़ कठिन श्रम के बाद अतुल जब अपने अस्थायी बसेरे में लौटते, तब थके शरीर और धूल से सनी किताबों के बीच उनका सपना जागता – देश के एक प्रतिष्ठित संस्थान से उच्च शिक्षा प्राप्त करना। उन्हीं क्षणों में अतुल ने तय कर लिया था कि वे अपनी किस्मत खुद लिखेंगे।

साधनों की कमी, पर हौसलों की नहीं

अतुल के पास इंटरनेट, कोचिंग या महंगे संसाधन नहीं थे। मोबाइल और इंटरनेट की सीमित सुविधा में ही उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। यूट्यूब पर मुफ्त में उपलब्ध लेक्चर, पुराने नोट्स और सैकड़ों बार पढ़े गए रट चुके सवालों के माध्यम से अतुल ने एक-एक विषय पर पकड़ बनाई। उन्होंने खुद से समय का प्रबंधन करना सीखा, कठिन विषयों को समझने के लिए स्थानीय शिक्षकों और ऑनलाइन कम्युनिटी से संपर्क किया।

इस मेहनत का फल मिला जब IIT JAM 2025 में उन्होंने शानदार प्रदर्शन कर दिखाया और IIT मद्रास में उनका चयन हो गया।

आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा

अतुल की सफलता सिर्फ उनकी नहीं है, बल्कि पूरे उत्तराखंड के युवाओं की उम्मीद की कहानी है। जिस राज्य में अक्सर रोजगार और संसाधनों की कमी की चर्चा होती है, वहां के एक ग्रामीण युवा का इतना बड़ा मुकाम हासिल करना प्रेरणास्रोत बन गया है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री सहित कई जनप्रतिनिधियों ने अतुल को बधाई दी है और उनकी मेहनत को सलाम किया है। सोशल मीडिया पर भी अतुल की कहानी वायरल हो चुकी है, जहां लोग उन्हें “पर्वतीय मेहनत का प्रतीक” कहकर संबोधित कर रहे हैं।

अतुल बोले – संघर्ष को ही अपना हथियार बनाएं

अपनी सफलता के बाद अतुल ने कहा, “मैंने कभी भी अपने हालातों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। पढ़ाई मेरी प्राथमिकता थी और रहेगा। मैं चाहता हूं कि हर बच्चा, चाहे वह किसी भी आर्थिक स्थिति से हो, हार न माने और अपने सपनों का पीछा करे।”

अतुल अब उच्च शिक्षा के साथ-साथ भविष्य में गांव के बच्चों को भी प्रेरित करना चाहते हैं और उनकी पढ़ाई में मदद करना चाहते हैं।

अतुल कुमार की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि अगर सच्ची लगन हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। खच्चर चलाने वाले एक युवक ने आज भारत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश पाकर यह दिखा दिया है कि “कड़ी मेहनत, सच्चा संकल्प और ईमानदारी से किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।”

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *