आशीष वाजपेयी: उत्तराखंड में राष्ट्रवाद, संस्कार और संघर्ष की नई आवाज़
👆ऊपर फोटो में परमार्थ निकेतन मुनि जी के साथ आशीष वाजपेई
देहरादून, अप्रैल 2025 – उत्तराखंड में राष्ट्रवादी विचारधारा और सनातन संस्कृति के लिए संघर्षरत एक प्रभावशाली चेहरा उभरकर सामने आया है – आशीष वाजपेयी। एक ओर जहां वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में संस्कारित समाज निर्माण में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने भारत रक्षा मंच से इस्तीफा देकर संगठनात्मक नैतिकता का भी उदाहरण प्रस्तुत किया है।
🔹 बाल संस्कार वर्ग: पांच दिन, पांच मूल शिक्षाएं
हाल ही में आशीष वाजपेयी ने उत्तराखंड में बच्चों के लिए 5 दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य था – भावी पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सनातन संस्कृति के मूल्यों से जोड़ना। इस शिविर में बच्चों को संघ गीत, प्रार्थना, सूर्य नमस्कार, लाठी संचालन, योग और दण्ड प्रशिक्षण के माध्यम से शारीरिक और मानसिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रशिक्षित किया गया।

शिविर का केंद्रबिंदु केवल शारीरिक विकास नहीं था, बल्कि उनमें नेतृत्व, सेवा, सहकारिता और देशभक्ति जैसे गुणों का भी विकास करना था। आशीष जी का मानना है कि –
“यदि हम बचपन से ही राष्ट्र के प्रति प्रेम और कर्तव्य का भाव बच्चों में जाग्रत करें, तो भारत का भविष्य स्वर्णिम होगा।”
🔹 भारत रक्षा मंच में नेतृत्व और त्याग
इससे पहले आशीष वाजपेयी भारत रक्षा मंच, उत्तराखंड के प्रदेश संगठन मंत्री के रूप में सक्रिय थे। उन्होंने उत्तराखंड के कई हिस्सों – जैसे हल्द्वानी, टिहरी, विकासनगर, रुड़की आदि में हिन्दुत्व, सनातन संस्कृति और राष्ट्रभक्ति से जुड़ी संगोष्ठियों का आयोजन किया। शिवाजी जयंती, गुरु तेग बहादुर बलिदान दिवस और वीर बाल दिवस जैसे कार्यक्रम उनके नेतृत्व में व्यापक स्तर पर आयोजित हुए।
लेकिन अप्रैल 2025 में उन्होंने संगठन से सार्वजनिक रूप से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के पीछे उन्होंने गंभीर आरोप लगाए कि मंच के कुछ शीर्ष नेताओं ने उन्हें ऐसे कामों के लिए दबाव डाला जो राष्ट्रहित और नैतिकता के खिलाफ थे। उनके अनुसार, उनसे कहा गया कि वे प्रदेश छोड़ दें और कुछ संदिग्ध गतिविधियों में सहयोग करें, जिसे उन्होंने स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया।
इस घटनाक्रम के बाद, प्रदेश की पूरी कार्यकारिणी ने एकजुट होकर संगठन से त्यागपत्र दे दिया। इससे स्पष्ट हुआ कि आशीष वाजपेयी न केवल नेतृत्वकर्ता हैं, बल्कि अपने सिद्धांतों के प्रति अडिग भी हैं।
आशीष वाजपेयी का कार्यक्षेत्र आज केवल एक संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एक ऐसे विचार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जो राष्ट्र, धर्म और समाज को एक सूत्र में पिरोने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है। बाल संस्कार शिविर हो या मंच पर धर्मवीरों की गाथा – उनका हर प्रयास भारत के भविष्य को जागरूक, संस्कारित और राष्ट्रनिष्ठ बनाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।