केदारनाथ हेली दुर्घटना: 7 श्रद्धालुओं की दुखद मौत, खराब मौसम बना कारण
रुद्रप्रयाग | 15 जून 2025
उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में एक बार फिर एक दुखद हेली दुर्घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया। रविवार सुबह करीब 5:17 बजे आर्यन कंपनी का एक हेलीकॉप्टर, जो केदारनाथ से गुप्तकाशी के लिए उड़ान भर रहा था, गौरीकुंड और त्रिजुगीनारायण के बीच के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में पायलट समेत सभी 7 लोगों की मौत हो गई, जिसमें एक 2 वर्षीय बच्ची भी शामिल थी।
❖ मौसम बना हादसे की मुख्य वजह
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार के अनुसार, प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण यह हादसा हुआ। हेलीकॉप्टर ने जैसे ही उड़ान भरी, कुछ ही देर बाद उसका संपर्क टूट गया और वह घने जंगलों में क्रैश हो गया।
❖ मृतकों की पहचान
इस हादसे में जान गंवाने वालों की सूची इस प्रकार है:
- राजवीर (पायलट)
- विक्रम रावत, बीकेटीसी निवासी रासी, ऊखीमठ
- विनोद, उत्तर प्रदेश
- तृष्टि सिंह, उत्तर प्रदेश
- राजकुमार, महाराष्ट्र
- श्रद्धा (35 वर्ष), महाराष्ट्र
- काशी (2 वर्ष), महाराष्ट्र
❖ स्थानीय महिलाओं ने दी सूचना
गौरीकुंड के ऊपर घास काटने गई कुछ महिलाओं ने जंगल में दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर को देखा और इसकी सूचना प्रशासन को दी। इसके बाद तुरंत पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके के लिए रवाना की गईं। आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप ने बताया कि घटनास्थल बेहद दुर्गम और कठिन पहाड़ी क्षेत्र है, जिससे राहत व बचाव कार्य में समय लग रहा है।
❖ मुख्यमंत्री ने जताया शोक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि “यह अत्यंत दुखद समाचार है। राज्य आपदा प्रतिवादन बल और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्यों में लगी हुई हैं। राज्य सरकार मृतकों के परिवारों के साथ खड़ी है।”
❖ पहले भी हो चुके हैं हादसे
गौरतलब है कि जून के पहले सप्ताह में भी एक हेलीकॉप्टर को तकनीकी खराबी के चलते आपात लैंडिंग करनी पड़ी थी। वह हेलीकॉप्टर क्रिस्टल एविएशन कंपनी का था और उसमें भी केदारनाथ यात्री सवार थे।
✍️ विश्लेषण
हर साल हजारों श्रद्धालु हवाई मार्ग से केदारनाथ धाम की यात्रा करते हैं। हाल के वर्षों में हेलीसेवा दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति ने सुरक्षा मानकों और मौसम पूर्वानुमान प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ज़रूरत है कि प्रशासन और हेली सेवा कंपनियाँ इस संवेदनशील मार्ग पर उड़ानों को लेकर और अधिक सतर्कता और पारदर्शिता अपनाएं।