EXCLUSIVE | सीएम धामी की सुरक्षा में बड़ी चूक, वन विभाग की घोर लापरवाही उजागर
रिपोर्ट: The Bharat Pulse |
उत्तराखंड के लोकप्रिय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सुरक्षा में एक गंभीर चूक का मामला सामने आया है, जिसने राज्य की सुरक्षा व्यवस्थाओं और विभागीय सतर्कता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह लापरवाही न सिर्फ शर्मनाक है बल्कि चिंताजनक भी, क्योंकि बात प्रदेश के शीर्ष पद की सुरक्षा से जुड़ी है।
🐅 कॉर्बेट में बिना फिटनेस वाली जिप्सी से सीएम को करवाई गई सफारी
6 जुलाई को मुख्यमंत्री धामी ने कुमाऊं दौरे के तहत कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का भ्रमण किया। लेकिन इस दौरान जो वाहन (जिप्सी) इस्तेमाल किया गया, उसकी फिटनेस 22 अगस्त 2020 को ही समाप्त हो चुकी थी। यही नहीं, इंश्योरेंस और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट भी अपडेट नहीं थे।
➡️ 5 साल से अनफिट गाड़ी में मुख्यमंत्री का सफर – क्या यह मामूली चूक है या सुरक्षा के साथ खिलवाड़?
🛑 वन विभाग की पुरानी गलती दोहराई गई
सफारी के दौरान जिस गाड़ी में मुख्यमंत्री बैठे थे, उसमें कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक साकेत बडोला भी मौजूद थे, जो पूर्व में राजाजी टाइगर रिजर्व में हुए वाहन हादसे के समय भी निदेशक थे।
उस हादसे में 6 वन कर्मियों की मौत हुई थी, और अब एक बार फिर वही अधिकारी, वही चूक।
🕵️♂️ सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका भी संदिग्ध
मुख्यमंत्री के हर दौरे से पहले उनका सुरक्षा प्रोटोकॉल तय किया जाता है, जिसमें गाड़ियों की जांच और फिटनेस की पुष्टि शामिल होती है। लेकिन इस बार न खुफिया एजेंसियों ने चेताया, न सुरक्षा अधिकारियों ने जांच की।
🎙️ वन मंत्री सुबोध उनियाल ने भी मानी गलती

शुरुआत में चुप्पी साधने के बाद वन मंत्री सुबोध उनियाल ने माना कि “चूक हुई है”, लेकिन यह चूक किस स्तर पर और क्यों हुई, इसका जवाब नहीं दे पाए।
उन्होंने यह भी कहा कि “सरकारी गाड़ियों का इंश्योरेंस नहीं होता”, लेकिन फिटनेस रिन्यू न होने पर वे चुप रहे।
✅ खबर के बाद फिटनेस रिन्यू
ARTO रामनगर संदीप वर्मा के मुताबिक, संबंधित वाहन की फिटनेस 8 जुलाई 2025 से दो साल के लिए रिन्यू कर दी गई है।
सवाल यह नहीं है कि अब फिटनेस हो गई, सवाल यह है कि 5 साल तक बिना फिटनेस के वाहन चलता रहा – और उसमें सीएम को बैठाया गया।
🔴 The Bharat Pulse का सवाल:
जब प्रदेश के मुख्यमंत्री ही असुरक्षित हैं, तो आमजन की सुरक्षा की क्या गारंटी है?
क्या विभागीय लापरवाही पर अब भी सिर्फ ‘मौन और माफी’ से काम चलेगा?