टिहरी गढ़वाल: बेसहारा गौमाताओं के लिए गौशाला निर्माण की मांग, सामाजिक कार्यकर्ता बलवीर सिंह पंवार ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
नई टिहरी ( उत्तराखंड)
टिहरी गढ़वाल के सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता बलवीर सिंह पंवार ने बेसहारा और निराश्रित गौमाताओं को आश्रय देने हेतु गौशाला निर्माण की मांग को लेकर जिलाधिकारी टिहरी को ज्ञापन सौंपा है।
पंवार ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि वे वर्ष 2019 से लगातार ग्राम कठूली (मदननेगी, धारमण्डल प्रतापनगर) में गौशाला निर्माण हेतु शासन-प्रशासन से कार्यवाही की मांग कर रहे हैं। लेकिन विगत 5–6 वर्षों से लगातार प्रयासों के बावजूद अभी तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में तत्कालीन जिलाधिकारी मंगलेश घिल्डियाल ने इस दिशा में आवश्यक आदेश जारी किए थे, लेकिन उनके अल्प कार्यकाल और स्थानांतरण के बाद यह प्रक्रिया अधर में लटक गई। इसके बाद से विभागीय स्तर पर “किन्तु-परन्तु” की आड़ में कार्यवाही टलती जा रही है।
बलवीर सिंह पंवार ने स्पष्ट किया कि वह इस कार्य को निस्वार्थ भाव से कर रहे हैं और इसमें उनका कोई आर्थिक स्वार्थ नहीं है। उन्होंने बताया कि गौशाला की देखरेख के लिए गाँव के ज़मींदारों का एक पंजीकरण भी कराया गया है, जो आगे जिम्मेदारी संभालेंगे।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि गौशाला निर्माण का कार्य ग्राम स्तर पर स्थानीय बेरोजगारों और महिलाओं को देकर किया जाए तो इससे गाँव की आर्थिकी को मजबूती मिलेगी और लोगों की आजीविका का साधन भी बनेगा।
सामाजिक कार्यकर्ता ने जिलाधिकारी से आग्रह किया कि आने वाली सर्दियों से पहले गौशाला निर्माण कार्य को पूरा कराया जाए ताकि बेसहारा और असहाय गौमाताओं को ठंड से निजात मिल सके।
ज्ञापन के अंत में उन्होंने जिलाधिकारी से शीघ्र कार्यवाही की उम्मीद जताई और उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
निराश्रित गौमाताओं के आश्रय का सवाल प्रधानमंत्री तक पहुँचा, फिर भी अधर में लटका गौशाला निर्माण का सपना
क्षेत्र में निराश्रित गौमाताओं के लिए आश्रय की समस्या को लेकर स्थानीय समाजसेवी द्वारा लगातार आवाज़ उठाई जा रही है। इस मामले में वर्ष 2020 से लेकर अब तक कई बार शासन-प्रशासन को पत्र लिखे गए। यहां तक कि यह मुद्दा सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक भी पहुँचाया गया, लेकिन आज भी गौशाला निर्माण का काम फाइलों में ही दबा हुआ है।

24 फरवरी 2020 को मदननेगी (कठूली) क्षेत्र में गौशाला निर्माण के लिए पहली बार जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल के समक्ष आवेदन किया गया था। तत्कालीन जिलाधिकारी मंगलेश घिल्डियाल ने इस पर त्वरित कार्यवाही भी की थी और निर्माण निगम घनसाली व उप तहसील मदननेगी को आगणन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे। लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
प्रार्थी के अनुसार, जिला प्रशासन करोड़ों रुपये अधिकारियों के आवासों की मरम्मत और सजावट में खर्च कर देता है, लेकिन निराश्रित गौमाताओं के लिए एक आश्रय तक नहीं बना पा रहा। यही मजबूरी रही कि गौशाला निर्माण का प्रस्ताव बार-बार शासन को भेजने के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय तक भी पत्र के जरिए गुहार लगाई गई।
दुखद यह है कि प्रधानमंत्री तक मामला पहुँचने के बाद भी स्थानीय प्रशासन ने कोई ठोस पहल नहीं की। पशु कल्याण बोर्ड से अनुमोदन दिलाने और भूमि आबंटन की प्रक्रिया में वर्षों से देरी हो रही है। शासन स्तर पर बनी नियमावली और चरणबद्ध प्रक्रिया – सर्वेक्षण, भूमि चिन्हांकन, निविदा व संचालन के स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद ज़मीनी स्तर पर अमल न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि निराश्रित गौमाताओं को लेकर संवेदनशीलता दिखाने की आवश्यकता है। बरसात व सर्दियों में खुले में विचरण करने वाली गायें दुर्घटनाओं और बीमारियों का शिकार हो रही हैं। यदि शीघ्र ही गौशाला निर्माण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो यह न केवल मानवीय भूल होगी बल्कि पशु संरक्षण कानूनों का भी उल्लंघन माना जाएगा।
ग्रामीण अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शासन और जिला प्रशासन इस बार गंभीरता दिखाएगा और प्रधानमंत्री तक पहुँचे इस मुद्दे को अनदेखा नहीं करेगा।
विशेष संवादाता दिल्ली