मसूरी की आवाज़: राघव-राज बिजल्वाण की चौथी किताब ‘The Echoes of Landour’ 📖 5 सितंबर को होगी लॉन्च
📍 मसूरी, उत्तराखंड। पर्यटन की नगरी और “क्वीन ऑफ हिल्स” कहलाने वाली मसूरी अब साहित्यिक मंच पर भी अपनी नई पहचान बना रही है। मसूरी के दो युवा लेखक राघव बिजल्वाण और राज बिजल्वाण अपनी चौथी पुस्तक ‘The Echoes of Landour: A Resonant Longing’ लेकर आए हैं। ✍️ इस काव्य संग्रह का विमोचन 5 सितंबर को मसूरी में नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी करेंगी।
यह किताब मसूरी और लैंडौर के बदलते स्वरूप, आधुनिक चुनौतियों और शहर की आत्मा को बचाने की भावनात्मक पुकार को सामने लाती है। ❤️
📖 किताब में क्या खास है?
‘The Echoes of Landour: A Resonant Longing’ दो हिस्सों में बंटी है—
1️⃣ ‘The Testimony of Our Times’ 👉 इसमें मसूरी की बदलती तस्वीर और समय के दबाव की गवाही मिलती है।
2️⃣ ‘Longing to Be Named’ 👉 इसमें अतीत की यादों और वर्तमान हकीकत के बीच का गहरा संघर्ष झलकता है।
लेखक बताते हैं कि मसूरी अब पहले जैसा नहीं रहा। भीड़भाड़, प्रदूषण और अनियोजित विकास ने शहर की रूह को आहत किया है। लेकिन वे कहते हैं—
✨ “सुरंग के अंत में रोशनी है, और मसूरी को बचाया जा सकता है।”
👨🏫 कौन हैं लेखक?
- दोनों भाई हैम्पटन कोर्ट स्कूल, मसूरी के पूर्व छात्र हैं।
- आगे की पढ़ाई ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी से की, जहाँ राघव को 🥇 गोल्ड मेडल और राज को 🥈 सिल्वर मेडल मिला।
- अब तक तीन किताबें लिख चुके हैं:
📚 ‘Devotion Through the Darkness’
📚 ‘Timeless Tales’
📚 ‘Longings of Landour’
👉 वर्तमान में राघव बिजल्वाण अंग्रेजी शिक्षक हैं और राज बिजल्वाण भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System) पर शोध कर रहे हैं।
🇮🇳 क्यों है नेशनल लेवल पर अहम?
यह काव्य संग्रह केवल मसूरी की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे भारत के उन पहाड़ी शहरों की आवाज़ है जो तेजी से बदलते दौर में अपनी पहचान खोते जा रहे हैं।
🏔️ उत्तराखंड, हिमाचल, दार्जिलिंग या नॉर्थ ईस्ट के हिल-स्टेशन्स — हर जगह यही चुनौती है। बढ़ता पर्यटन, अव्यवस्थित विकास और पर्यावरणीय संकट इन शहरों को खतरे में डाल रहे हैं।
इस किताब के जरिए लेखक ने देशभर के पाठकों को संदेश दिया है कि शहर सिर्फ इमारतों और भीड़ का नाम नहीं होते, उनकी आत्मा होती है, जिसे बचाना जरूरी है। 🌱
🎉 लॉन्चिंग समारोह
📅 तारीख – 5 सितंबर
📍 स्थान – मसूरी
👤 मुख्य अतिथि – नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी
यह कार्यक्रम साहित्य प्रेमियों और मसूरी की संस्कृति से जुड़े लोगों के लिए खास होने जा रहा है।
✨ कुल मिलाकर, ‘The Echoes of Landour’ सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि मसूरी और लैंडौर के भविष्य के लिए उठी एक सशक्त पुकार है। यह राष्ट्रीय स्तर पर साहित्य, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण पर एक नई बहस को जन्म दे सकती है। 🌍📚