मोहन सिंह रावत ‘मोना भाई’ के प्रयासों से टिहरी में गौशाला निर्माण को मिली स्वीकृति
अब निराश्रित गोवंश को मिलेगा संरक्षण, ₹65.24 लाख की योजना को हरी झंडी
टिहरी गढ़वाल: नगर पालिका परिषद टिहरी के अध्यक्ष मोहन सिंह रावत ‘मोना भाई’ की सक्रिय पहल से टिहरी में निराश्रित गोवंश संरक्षण के लिए एक बड़ी योजना को स्वीकृति मिल गई है। उत्तराखंड शासन ने ₹65.24 लाख की डीपीआर को मंजूरी दी, जिससे टिहरी के जे-ब्लॉक क्षेत्र में गौशाला निर्माण और विस्तार का रास्ता साफ हो गया है।
कैसे मिली स्वीकृति?
यह मामला लंबे समय से लंबित था। नगर पालिका टिहरी द्वारा गौशाला निर्माण के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन प्रशासनिक अड़चनों के कारण प्रोजेक्ट को गति नहीं मिल पा रही थी। इस पर नगर पालिका अध्यक्ष मोहन सिंह रावत ने व्यक्तिगत रुचि दिखाते हुए इसे जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के समक्ष प्रस्तुत किया।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को संज्ञान में लेते हुए पुनर्वास निदेशालय, टिहरी बांध परियोजना से नगर पालिका परिषद टिहरी को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करवाया। इसके बाद अब गौशाला निर्माण का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है।

नगर पालिका अध्यक्ष मोहन सिंह रावत का बयान
नगर पालिका अध्यक्ष मोहन सिंह रावत ‘मोना भाई’ ने इस महत्वपूर्ण फैसले पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय टिहरी के निराश्रित गोवंशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा—
“हम लंबे समय से इस कार्य को करवाने के प्रयास में थे। अब जब जिलाधिकारी महोदय के सहयोग से इसे मंजूरी मिल गई है, तो हम जल्द से जल्द कार्ययोजना बनाकर गौशाला निर्माण का काम शुरू करेंगे। निराश्रित गोवंशों के संरक्षण के लिए यह एक बड़ा कदम है।”
जनता को क्या होगा लाभ?
- टिहरी नगर क्षेत्र में बेसहारा गोवंश के लिए उचित आश्रय मिलेगा।
- सड़कों पर घूम रहे पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
- गौशाला निर्माण से पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
- नगर क्षेत्र में स्वच्छता और यातायात व्यवस्था में सुधार होगा।
भविष्य की योजनाएं
मोहन सिंह रावत ने यह भी कहा कि नगर पालिका टिहरी भविष्य में पशुओं की देखभाल और सुरक्षा के लिए और भी नई योजनाओं पर कार्य करेगी। उन्होंने जनता से भी आह्वान किया कि वे बेसहारा पशुओं की सेवा और संरक्षण में सहयोग करें।
प्रशासन की सक्रियता से वर्षों पुरानी समस्या का समाधान
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की सकारात्मक सोच और नगर पालिका के ठोस प्रयासों से पिछले दो वर्षों से लंबित यह समस्या अब हल हो गई है। अब जल्द ही इस योजना को धरातल पर उतारा जाएगा, जिससे टिहरी नगर में पशु संरक्षण को एक नई दिशा मिलेगी।
निष्कर्ष
नगर पालिका टिहरी और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से अब निराश्रित गोवंश को उचित देखभाल और आश्रय मिल सकेगा। यह फैसला सिर्फ पशुओं के लिए ही नहीं, बल्कि टिहरी की जनता के लिए भी राहतभरा साबित होगा।
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