“टिहरी झील में साहसिक खेलों का निरीक्षण, हेमराज बिष्ट ने कहा: देवभूमि को खेलभूमि बनाना है लक्ष्य”
टिहरी गढ़वाल। राज्य स्तरीय खेल परिषद के उपाध्यक्ष हेमराज बिष्ट ने रविवार को टिहरी झील पहुंचकर वहां संचालित साहसिक जल क्रीड़ा गतिविधियों (Adventure Sports) का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों और खिलाड़ियों से मुलाकात कर साहसिक खेलों की वर्तमान स्थिति, सुरक्षा प्रबंधन और पर्यटन से जुड़ी संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
निरीक्षण के बाद श्री बिष्ट ने कहा कि टिहरी झील को साहसिक खेलों का केंद्र बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। यहां की प्राकृतिक सौंदर्यता और भौगोलिक अनुकूलता इस क्षेत्र को जल क्रीड़ा, ट्रैकिंग, रिवर राफ्टिंग, जेट स्कीइंग और पैराग्लाइडिंग जैसे खेलों के लिए आदर्श बनाती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में ठोस प्रयास कर रही है ताकि युवाओं को खेल के माध्यम से रोजगार और पहचान मिल सके।

इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विकासशील सोच और युवा उन्नति की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की भी भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि “मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ‘देवभूमि’ के साथ-साथ ‘खेलभूमि’ बनने की दिशा में भी मजबूती से आगे बढ़ रहा है। उनकी सोच दूरदर्शी है और वह युवाओं को सशक्त बनाने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं।”
दौरे में उनके साथ उत्तराखंड गोसेवा आयोग के सदस्य धर्मवीर गुसाईं भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी टिहरी झील को साहसिक खेलों और ग्रामीण पर्यटन के लिए एक आदर्श स्थल बताते हुए सरकार के प्रयासों को सराहा।
स्थानीय क्षेत्र से गेंवली गांव के प्रधान रमेश कुमाई, भाजपा युवा मोर्चा के नेता सोहन चौहान और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष शंकर नेगी भी विशेष रूप से मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने क्षेत्र की खेल आवश्यकताओं, संसाधनों की कमी और युवाओं के सपनों को साझा किया।
इस मौके पर टिहरी भाजपा के वरिष्ठ नेता शिव सिंह बिष्ट ने हेमराज बिष्ट को डोबरा चांटी पुल का एक चित्र भेंट किया, जिसे राज्य के साहसिक खेल और पर्यटन की प्रतीकात्मक धरोहर के रूप में देखा जाता है।

श्री बिष्ट ने आश्वासन दिया कि खेल परिषद प्रदेश के सभी जिलों में खेल सुविधाओं का विस्तार करेगी, और टिहरी जैसे स्थानों में विशेष ध्यान साहसिक खेलों के विकास पर केंद्रित रहेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में टिहरी झील को राष्ट्रीय स्तर की साहसिक खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन स्थल बनाया जाएगा।
यह कार्यक्रम न केवल स्थानीय खिलाड़ियों के लिए उत्साहवर्धक रहा, बल्कि टिहरी को एक खेल पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के प्रयासों को और गति देने वाला साबित हुआ।