इज़राइल-अमेरिका का ईरान पर बड़ा सैन्य अभियान: ‘ऑपरेशन Roaring Lion’ से मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बड़ा सैन्य तनाव देखने को मिल रहा है। इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका की संयुक्त सेनाओं ने 28 फरवरी 2026 को ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया है। इज़राइल ने इस ऑपरेशन को “Operation Roaring Lion” (हिब्रू: Sha’agat Ha’Ari – शेर की दहाड़) नाम दिया है, जबकि अमेरिका ने इसे “Operation Epic Fury” कहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता, एयर डिफेंस सिस्टम, न्यूक्लियर से जुड़ी साइट्स और सैन्य कमांड सेंटर को निशाना बनाना है। इज़राइल और अमेरिका का कहना है कि यह अभियान क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने और संभावित परमाणु खतरे को रोकने के लिए चलाया जा रहा है।
सैकड़ों ठिकानों पर हमले
इज़राइल डिफेंस फोर्स (IDF) और अमेरिकी सैन्य बलों ने अब तक ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हवाई और मिसाइल हमले किए हैं। शुरुआती दावों के मुताबिक 600 से अधिक टारगेट्स को निशाना बनाया गया है।
इस अभियान में इज़राइल एयर फोर्स की ओर से 200 से ज्यादा युद्धक विमान एक साथ मिशन पर भेजे गए, जिसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा एयर ऑपरेशन माना जा रहा है।
कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि ईरान की शीर्ष नेतृत्व संरचना को भी निशाना बनाया गया, जिसमें Ali Khamenei से जुड़े सुरक्षा ढांचे पर हमलों की खबरें सामने आई हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं हुई है।
पिछले ऑपरेशन से जुड़ा कनेक्शन
विश्लेषकों के अनुसार यह अभियान 2025 में हुए एक पुराने सैन्य अभियान का विस्तार माना जा रहा है। जून 2025 में इज़राइल ने ईरान के खिलाफ “Operation Rising Lion” चलाया था।
अब “Rising Lion” के बाद “Roaring Lion” नाम को उस रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें संकेत दिया गया है कि इज़राइल अब और अधिक आक्रामक रुख अपना रहा है।
‘शेर’ का प्रतीक क्यों?
इस ऑपरेशन के नाम में इस्तेमाल किया गया “Lion” प्रतीक इज़राइल की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान से जुड़ा माना जाता है।
यहूदी परंपरा में Lion of Judah शक्ति और साहस का प्रतीक है, जो प्राचीन यहूदा कबीले से जुड़ा हुआ है। इसी वजह से शेर को इज़राइल की राष्ट्रीय और सांस्कृतिक पहचान में एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।
इसके अलावा Jerusalem को ऐतिहासिक रूप से “Ariel” यानी “Lion of God” भी कहा जाता है, जिससे यह प्रतीक और मजबूत हो जाता है।
ईरान के साथ प्रतीकात्मक टकराव
दिलचस्प बात यह है कि इस्लामिक रिवॉल्यूशन से पहले ईरान का राष्ट्रीय प्रतीक भी Lion and Sun (शेर और सूरज) हुआ करता था। आज भी कई ईरानी विपक्षी समूह उसी पुराने झंडे का इस्तेमाल करते हैं।
इसी कारण कुछ विशेषज्ञ “Roaring Lion” नाम को एक तरह का प्रतीकात्मक संदेश भी मान रहे हैं।
क्षेत्र में बढ़ सकता है तनाव
मध्य-पूर्व के कई सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान क्षेत्र में बड़े भू-राजनीतिक बदलाव ला सकता है।
ईरान समर्थित संगठनों जैसे Hezbollah और अन्य प्रॉक्सी समूहों के सक्रिय होने की आशंका भी जताई जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
इज़राइल और अमेरिका का यह संयुक्त सैन्य अभियान मिडिल ईस्ट की राजनीति और सुरक्षा संतुलन के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। हालात तेजी से बदल रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।