क्या दुनिया किसी बड़े भूचाल की ओर बढ़ रही है? ट्रंप की वापसी से पहले यूरोपीय देश अमेरिका से मांग रहे हैं अपना ‘सोना’ वापस!
नई दिल्ली/यूरोप, जून 2025 — क्या दुनिया की आर्थिक सत्ता संतुलन के मोड़ पर खड़ी है? क्या वैश्विक संकट की आहट आ चुकी है? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि हाल ही में यूरोप के कई देशों ने अमेरिका से अपने गोल्ड रिजर्व्स वापस मांगने की मुहिम शुरू कर दी है। और इस बार वजह केवल डर या सतर्कता नहीं, बल्कि संभावित रूप से डोनाल्ड ट्रंप की दोबारा सत्ता में वापसी बताई जा रही है।
📉 तीन सालों में रिकॉर्ड गोल्ड खरीद
2022, 2023 और 2024 में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने हर साल 1000 टन से ज़्यादा सोना खरीदा — यह पिछले दशक के औसत (400–500 टन) से दोगुना है। विशेषज्ञ इसे एक ‘साइलेंट इमरजेंसी प्रेपरेशन’ मान रहे हैं।
🇩🇪 जर्मनी, फ्रांस और इटली क्यों चिंतित हैं?
EU देशों का भारी मात्रा में सोना अमेरिका की न्यूयॉर्क फेडरल रिज़र्व और लंदन के बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा गया है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की अस्थिरता के कारण यह एक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बन गई थी। पर अब वही देश उस व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
📣 Taxpayers Association of Europe (TAE) की खुली अपील
TAE ने कहा है कि यूरोपीय देशों को अपना सोना या तो वापस मंगाना चाहिए या फिर उसका स्वतंत्र ऑडिट और इन्वेंट्री करानी चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
⚠️ ट्रंप पर क्यों है संदेह?
पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले भी US Federal Reserve की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट्स का दावा है कि अगर ट्रंप फिर सत्ता में आए और अमेरिकी सरकार विदेशी सोने की वापसी को “राष्ट्रीय हित के खिलाफ” बता दे तो? जर्मन सांसदों को पहले ही अपने सोने को देखने की अनुमति नहीं दी गई थी।
🏦 यूरोपीय सोना कहां है?
सटीक आंकड़े सार्वजनिक नहीं हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी का लगभग आधा गोल्ड मैनहैटन की चट्टानों के नीचे 80 फीट गहरी तिजोरी में रखा गया है।
💰 क्या गोल्ड बन गया है नया ग्लोबल हथियार?
गोल्ड को सेफ हैवेन माना जाता है — यानी संकट में सबसे सुरक्षित। अब यही गोल्ड, भू-राजनीतिक उठापटक का सबसे बड़ा सूचक बनता जा रहा है।
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