सपनों से हकीकत तक: IIT बॉम्बे में मेरा पहला साल
– अंशुल नौटियाल से एक प्रेरणादायक बातचीत
The Bharat Pulse विशेष संवाददाता के साथ
पारिवारिक पृष्ठभूमि और शुरुआती सफर
The Bharat Pulse: अंशुल, सबसे पहले हार्दिक बधाई कि आपने न सिर्फ JEE जैसी कठिन परीक्षा को पास किया, बल्कि देश के सर्वोच्च संस्थानों में से एक, IIT बॉम्बे में दाखिला भी लिया। शुरुआत यहीं से करते हैं—आपका बचपन और पारिवारिक पृष्ठभूमि कैसी रही?
अंशुल नौटियाल: धन्यवाद! मेरा जन्म और पालन-पोषण देहरादून में हुआ, लेकिन हमारा मूल निवास टिहरी जिले के एक छोटे से गाँव जलवाल में है। मेरे पिता भारतीय सेना में थे और अब रिटायर्ड हो चुके हैं। घर में अनुशासन और मेहनत की बहुत अहमियत रही है। सेना के माहौल ने मुझे शुरू से ही सिखाया कि अगर लक्ष्य बड़ा हो, तो मेहनत भी उसी स्तर की होनी चाहिए। मेरे लिए IIT सिर्फ एक संस्थान नहीं, बल्कि एक सपना था—और उस सपने को पूरा करने की शुरुआत देहरादून के एक छोटे से स्टडी रूम से हुई।
IIT: एक सपना जो दूर से असंभव लगता था
The Bharat Pulse: IIT का नाम सुनते ही एक अलग ही प्रतिष्ठा का एहसास होता है। आपने कब महसूस किया कि अब आपको IIT के लिए तैयारी करनी है?
अंशुल: शुरुआत में, honestly, मुझे IIT की दुनिया बहुत दूर और मुश्किल लगती थी। ऐसा लगता था कि ये बस उन्हीं का मुकाम है जो बचपन से ही जीनियस होते हैं। लेकिन धीरे-धीरे, जब मैंने खुद से सवाल पूछने शुरू किए—“क्यों नहीं हो सकता?”—तब एक चिंगारी जगी। 11वीं क्लास में जब मैंने JEE की तैयारी शुरू की, तो डर तो था, पर जिद उससे बड़ी थी। खुद पर भरोसा धीरे-धीरे बढ़ता गया, और हर दिन बस यही सोचकर मेहनत करता था कि अगर कोशिश ईमानदारी से की जाए, तो रास्ते खुद-ब-खुद बनते हैं।
IIT बॉम्बे की दहलीज पर कदम रखना – एक नया अध्याय
The Bharat Pulse: जब आपने IIT बॉम्बे में प्रवेश लिया और पहली बार कैंपस में कदम रखा, तब कैसा महसूस हुआ?
अंशुल (हंसते हुए): वो पल शब्दों में बयान करना मुश्किल है। जैसे किसी फिल्म का क्लाइमेक्स चल रहा हो, और आप उसमें मुख्य किरदार हों। IIT बॉम्बे का कैंपस बहुत ही खूबसूरत और ऊर्जावान है। शुरुआत में थोड़ा डर और घबराहट थी—क्योंकि आप सोचते हैं कि यहाँ सब आपसे ज़्यादा तेज़ हैं। लेकिन फिर धीरे-धीरे जब आप इस माहौल का हिस्सा बनने लगते हो, तो यकीन आता है कि “मैं भी यहीं का हूँ।”
पहला सेमेस्टर: दोस्त, हॉस्टल और ढेर सारी नई कहानियाँ
The Bharat Pulse: पहले साल के शुरुआती अनुभव कैसे रहे? क्या हॉस्टल लाइफ ने कुछ नया सिखाया?
अंशुल: बिल्कुल! पहला सेमेस्टर तो नए लोगों से मिलने, जगह-जगह ओरिएंटेशन अटेंड करने और खुद को इस माहौल में ढालने में निकल गया। हॉस्टल लाइफ अपने आप में एक पूरा अध्याय है। यहाँ हर कमरे की अपनी कहानी है, और हर दोस्त एक नई दुनिया लेकर आता है। मैं बहुत लकी रहा कि मुझे ऐसे दोस्त मिले जो आज भी मेरे सबसे क़रीबी हैं—कुछ ऐसे जिन्होंने मुश्किल वक्त में भी मेरा साथ नहीं छोड़ा।
IIT बॉम्बे: केवल पढ़ाई नहीं, एक जीवनशैली
The Bharat Pulse: IIT में पढ़ाई तो प्रसिद्ध है ही, लेकिन क्या आपको और भी कुछ एक्सप्लोर करने का मौका मिला?
अंशुल: हाँ, यही तो IIT बॉम्बे की सबसे बड़ी खूबी है—यहाँ आपको सिर्फ अकादमिक रूप से नहीं, हर दिशा में विकसित होने का मौका मिलता है। मैंने स्पोर्ट्स, कल्चरल क्लब्स, आर्ट वर्कशॉप्स और यहां तक कि रिसर्च से जुड़ी कुछ परियोजनाओं में भी हिस्सा लिया। शुरू में थोड़ा प्रेशर ज़रूर महसूस हुआ, क्योंकि सबकुछ नया था, लेकिन जब आप अलग-अलग चीजें आजमाते हैं, तो खुद को समझने में मदद मिलती है। हमने कुछ ऑफ-कैंपस ट्रिप्स भी कीं, और वो पल मेरे जीवन के सबसे मस्त पलों में से हैं।

सेकेंड सेमेस्टर: फोकस, जिम्मेदारी और असली IIT लाइफ
The Bharat Pulse: जब पहला उत्साह थोड़ा थमता है, तब असली पढ़ाई और जिम्मेदारियाँ शुरू होती हैं। आपका अनुभव कैसा रहा?
अंशुल: बिल्कुल सही कहा आपने। सेकेंड सेमेस्टर तक आते-आते लोग अपनी राह पकड़ लेते हैं। कुछ लोग एकेडमिक्स में गहराई से उतरते हैं, कुछ क्लब्स और टेक्निकल प्रोजेक्ट्स में डूब जाते हैं। मेरे लिए ये फेज बहुत ट्रांसफॉर्मेटिव था। यहाँ मैंने टाइम मैनेजमेंट, टीमवर्क और खुद पर भरोसा करना सीखा। हाँ, मस्ती बंद नहीं हुई, लेकिन ज़िम्मेदारियाँ भी आ गईं।
JEE की मेहनत—क्या वो सब वाकई वर्थ था?
The Bharat Pulse: आख़िर में, जब आप पीछे मुड़कर देखते हैं, तो क्या लगता है—वो JEE की कठिन यात्रा, वो नींदें, वो तनाव—क्या सब वर्थ था?
अंशुल (गंभीर होते हुए): 100% वर्थ था। जो सफर मैंने तय किया, उसने मुझे सिर्फ एक स्टूडेंट नहीं, एक मजबूत इंसान बनाया। JEE की तैयारी ने मुझे मेहनत करना सिखाया, और IIT बॉम्बे ने मुझे खुद को एक्सप्लोर करना सिखाया। आज अगर कोई बच्चा कहीं किसी छोटे से गाँव में बैठा ये सपना देख रहा है, तो मैं बस इतना कहना चाहूंगा—डर मत, तू भी कर सकता है। बस खुद पर विश्वास और निरंतर मेहनत ज़रूरी है।
The Bharat Pulse: अंशुल, आपने जो अनुभव हमारे साथ साझा किए, वो निश्चित ही हजारों छात्रों और अभिभावकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे। आपके उज्ज्वल भविष्य की हम कामना करते हैं!
अंशुल: बहुत-बहुत धन्यवाद! मुझे खुशी है कि मैंने अपनी जर्नी The Bharat Pulse के ज़रिए साझा की। उम्मीद है कि ये कहानी किसी न किसी के सपने को दिशा देगी।
लेखक: विशेष संवाददाता, The Bharat Pulse
फोटो सौजन्य: IIT बॉम्बे कैंपस व अंशुल नौटियाल के निजी संग्रह से