जेन Z आंदोलन का नया शिकार मेडागास्कर: राष्ट्रपति राजोएलिना भागे, सेना ने थामी सत्ता का तख्ता
अफ्रीका के द्वीप राष्ट्र मेडागास्कर में जेन Z की अगुवाई वाले आंदोलन ने तख्तापलट कर दिया। हफ्तों से राजधानी अंटानानारिवो में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच सेना ने सत्ता अपने हाथों में ले ली है। राष्ट्रपति एंड्री राजोएलिना देश छोड़कर भाग गए हैं, और सेना ने कहा है कि अब वह संक्रमणकालीन सरकार बनाएगी। यह घटना पिछले एक महीने में जेन Z आंदोलनों से प्रभावित दूसरे देश में तख्तापलट है, जो वैश्विक युवा असंतोष की लहर को दर्शाती है।
प्रदर्शन सितंबर 2025 के अंत से शुरू हुए, जब बिजली और पानी की किल्लत ने युवाओं को सड़कों पर उतार दिया। जल्द ही यह आंदोलन महंगाई, गरीबी, भ्रष्टाचार और राजोएलिना सरकार की नाकामियों के खिलाफ फैल गया। जेन Z मदा नामक युवा संगठन ने सोशल मीडिया पर #RajoelinaMustGo कैंपेन चलाया, जिसमें हजारों युवा शामिल हुए। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, प्रदर्शनों में कम से कम 22 लोग मारे गए, जबकि सैकड़ों घायल हुए। राजधानी के इंडिपेंडेंस एवेन्यू पर युवा झंडे लहराते हुए नारे लगाते रहे, “भ्रष्टाचार खत्म करो, स्वतंत्रता लाओ!”
मंगलवार को निर्णायक मोड़ आया। एलीट मिलिट्री यूनिट कैपसैट (जो 2009 में राजोएलिना को सत्ता दिलाने में सहायक थी) ने प्रदर्शनकारियों का साथ दे दिया। कैपसैट ने कहा, “राष्ट्रपति और मंत्रिमंडल को इस्तीफा देना चाहिए।” उसी समय, पैरामिलिट्री जेंडारमेरी का एक गुट भी विद्रोह में शामिल हो गया। सेना ने संसद भंग कर दी, सीनेट प्रेसिडेंट को हटा दिया और नई अस्थायी व्यवस्था की घोषणा की। कर्नल माइकल रैंड्रियनिरिना ने कहा, “हम संविधान का सम्मान करेंगे, लेकिन स्थिरता के लिए सत्ता संभाल रहे हैं।”
राजोएलिना ने सोमवार रात फेसबुक लाइव से अनजान जगह से संबोधन किया। उन्होंने कहा, “मैं जान के डर से देश छोड़ चुका हूं, लेकिन इस्तीफा नहीं दूंगा। संवाद से समाधान निकले।” रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्रेंच मिलिट्री एयरक्राफ्ट से उन्हें निकाला गया, हालांकि फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने इससे इनकार किया। राजोएलिना ने रविवार को चेतावनी दी थी, “सत्ता हथियाने की साजिश चल रही है।” लेकिन कैपसैट के विद्रोह ने उन्हें अलग-थलग कर दिया। विपक्ष के नेता ने कहा, “यह जनता की जीत है।”
यह तख्तापलट राजोएलिना के 16 साल पुराने शासन का अंत लगता है। 2009 में उसी कैपसैट की मदद से उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति मार्क रावलोमानाना को हटाया था। 2018 में चुनाव जीतने के बाद भी आलोचना झेलते रहे। प्रदर्शनकारियों में 24 वर्षीय फिनारित्रा मैनित्रा जैसे युवा शामिल थे, जिन्होंने कहा, “राष्ट्रपति माफी मांगें और इस्तीफा दें।” फ्रांस ने हस्तक्षेप से इनकार किया, लेकिन विपक्ष ने इसे “फ्रांस की साजिश” बताया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया तेज। संयुक्त राष्ट्र ने शांति की अपील की, जबकि अफ्रीकी संघ ने निंदा की। भारत ने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा। विशेषज्ञों का कहना है कि जेन Z आंदोलन, जो नेपाल और बांग्लादेश में सफल रहा, अब अफ्रीका तक फैल रहा। मेडागास्कर की 3.1 करोड़ आबादी में युवा बेरोजगारी चरम पर है। सेना ने संक्रमणकालीन सरकार का वादा किया, लेकिन प्रदर्शनकारी सतर्क हैं – “राजनीतिक ठगों से सावधान रहें।”
फिलहाल, राजधानी में तनाव बरकरार। सेना ने कर्फ्यू लगाया, लेकिन युवा “मासेस ने जीत हासिल की” का नारा लगा रहे। क्या यह नया दौर लाएगा या अराजकता? दुनिया देख रही है।