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AAP नेता अवध ओझा का राजनीति से संन्यास: हार के 10 महीने बाद अलविदा

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नई दिल्ली, 2 दिसम्बर 2025।
आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और मशहूर UPSC कोच अवध ओझा ने राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी है। दिसंबर 2024 में राजनीति में प्रवेश कर कुछ ही महीनों में AAP के प्रमुख चेहरों में शामिल हुए ओझा ने सोमवार को एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि यह उनका “व्यक्तिगत निर्णय” है। उन्होंने AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल को “बहुत महान नेता” बताते हुए धन्यवाद दिया। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेता सोमनाथ भारती ने इस फैसले को “नॉट डन” बताते हुए नाराजगी जताई है।


ओझा का पोस्ट—“राजनीति से संन्यास मेरा निजी निर्णय, AAP ने बहुत सम्मान दिया”

अपनी पोस्ट में ओझा ने लिखा:
“आदरणीय अरविंद जी, मनीष जी, संजय जी, AAP के सभी पदाधिकारी, कार्यकर्ता, नेता—आप सभी का दिल से बहुत-बहुत धन्यवाद। जो प्रेम और सम्मान आपने दिया, उसका ऋणी रहूंगा। राजनीति से संन्यास मेरा व्यक्तिगत निर्णय है। अरविंद जी, आप एक बहुत महान नेता हैं। जय हिंद।”

उन्होंने पटपड़गंज विधानसभा के लोगों को भी धन्यवाद दिया और कहा कि उन्हें “बहुत प्यार” मिला।


10 महीने पहले मिली थी हार, पहली राजनीतिक पारी रही छोटी

अवध ओझा ने दिसंबर 2024 में AAP जॉइन की थी। उन्हें पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की पारंपरिक सीट पटपड़गंज से टिकट दिया गया, लेकिन वे BJP उम्मीदवार रविंदर सिंह नेगी से 28,000 से अधिक वोटों से हार गए।
AAP में शामिल होते समय ओझा ने कहा था—“शिक्षा सुधार मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य है। AAP बच्चों के भविष्य को मजबूत करती है।”

केजरीवाल ने भी उनकी सराहना करते हुए कहा था कि ओझा ने लाखों युवाओं को रोजगार योग्यता तक पहुंचाया है।


सोमनाथ भारती का टकराव—“राजनीति शॉर्ट-टर्म प्रोजेक्ट नहीं”

ओझा की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए AAP नेता सोमनाथ भारती ने लिखा:
“आपका सम्मान है, लेकिन राजनीति कोई शॉर्ट-टर्म प्रोजेक्ट नहीं है। पार्टी ने आपको टिकट दिया था, उम्मीद थी कि हार के बाद भी आप AAP के साथ काम करते।”
उनके इस बयान को पार्टी में असहजता का संकेत माना जा रहा है।

AAP के अन्य नेता इस मुद्दे पर चुप हैं, जबकि सूत्र बताते हैं कि पार्टी इस पूरी स्थिति की आंतरिक समीक्षा कर रही है।


विपक्ष का हमला—“महान नेतृत्व ही लोगों को भगा रहा है”

ओझा के संन्यास ने विपक्ष को भी मौका दे दिया है।
BJP नेताओं ने तंज कसते हुए कहा—
“केजरीवाल का ‘महान नेतृत्व’ ही लोगों को पार्टी छोड़ने पर मजबूर कर रहा है।”
विपक्ष ने इस फैसले को AAP की “आंतरिक कलह” बताया।


ओझा की पहचान—UPSC कोच, मोटिवेशनल स्पीकर, और गीता पर व्याख्यानों के लिए मशहूर

अवध ओझा को “ओझा सर” के नाम से लाखों छात्र जानते हैं। उनके Gita lectures और UPSC motivational क्लासेस सोशल मीडिया पर लगातार वायरल होते रहे हैं।
राजनीति में आने का मुख्य उद्देश्य शिक्षा सुधारों को गति देना था, लेकिन हार ने उनकी भूमिका कमजोर कर दी।

विशेषज्ञों का कहना है कि ओझा का यह संन्यास AAP की युवा नेतृत्व भर्ती रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


सोशल मीडिया पर #AvadhOjhaRetires ट्रेंड

सोशल मीडिया पर #AvadhOjhaRetires ट्रेंड कर रहा है, जहां समर्थक उन्हें “शिक्षा योद्धा” और “युवाओं का प्रेरक मार्गदर्शक” बता रहे हैं।
ओझा ने भले ही संन्यास को व्यक्तिगत बताया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वे पूरी तरह राजनीति छोड़ रहे हैं या आगे सलाहकार के रूप में लौट सकते हैं।

उनके भविष्य को लेकर सस्पेंस बरकरार है।

 

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