देहरादून में दिनदहाड़े युवती की गला रेतकर हत्या, पुलिस की अनदेखी बनी मौत की वजह
देहरादून में दिनदहाड़े युवती की गला रेतकर हत्या, पुलिस की अनदेखी बनी मौत की वजह
📍 भरे बाजार में वारदात, पहले से थी शिकायत – फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
देहरादून/नई दिल्ली।
आध्यात्म, शांति और संस्कारों की पहचान रही **देवभूमि उत्तराखंड** एक बार फिर अपराध की भयावह तस्वीर से देश के सामने शर्मसार हो गई है। राजधानी देहरादून में सोमवार को भरे बाजार, दिनदहाड़े 23 वर्षीय युवती की गर्दन काटकर हत्या कर दी गई। इस जघन्य हत्याकांड ने न सिर्फ देहरादून बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। 😡
🩸 **मच्छी बाजार में खून से सनी सड़कें**
नगर कोतवाली क्षेत्र के मच्छी बाजार इलाके में हुई इस सनसनीखेज वारदात में **गुंजन (23)** नाम की युवती की धारदार चापड़ से गला रेतकर हत्या कर दी गई। गुंजन पिछले 5–6 वर्षों से दूल्हा बाजार में कपड़ों की दुकान पर काम करती थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक बाइक सवार युवक ने गुंजन को रोका, बातचीत के बहाने खड़ा किया और अचानक उसकी गर्दन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। 🏍️🔪
गंभीर हालत में अस्पताल ले जाई गई युवती ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
👮♂️ **पहले दी थी जान का खतरा, पुलिस सोती रही**
इस हत्याकांड ने उत्तराखंड पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी **आकाश कुमार**, निवासी खुड़बुड़ा, लंबे समय से गुंजन का पीछा कर रहा था। दोनों के बीच कई बार विवाद भी हुआ था।
⚠️ सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि
➡️ आरोपी ने कुछ दिन पहले गुंजन को **जान से मारने की धमकी दी थी**
➡️ गुंजन ने इसकी **शिकायत खुड़बुड़ा पुलिस चौकी में दर्ज कराई थी**
➡️ लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की
आज वही लापरवाही एक बेटी की जान ले गई। 😔
🚔 **आरोपी गिरफ्तार, लेकिन सवाल बाकी**
घटना के बाद पुलिस ने आरोपी आकाश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।
लेकिन सवाल यह है कि
❓ अगर शिकायत पर समय रहते कार्रवाई होती
❓ अगर आरोपी को रोका जाता
तो क्या आज गुंजन जिंदा नहीं होती?
🔥 **देवभूमि में उबाल, बाजार बंद**
घटना के विरोध में मच्छी बाजार और आसपास के इलाकों की सभी दुकानें बंद रहीं। व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया।
लोगों की मांग है —
👉 आरोपी को फांसी जैसी सख्त सजा
👉 लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
🚺 **महिला सुरक्षा पर राष्ट्रीय बहस जरूरी**
देहरादून की यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का प्रतीक है। जब एक युवती खतरे की आशंका जताकर पुलिस के पास जाती है और फिर भी उसे नहीं बचाया जा पाता, तो यह पूरे तंत्र पर सवाल है।
देवभूमि को अपराध से नहीं, सुरक्षा से पहचाना जाना चाहिए।**
आज देश पूछ रहा है —
क्या उत्तराखंड की बेटियां सुरक्षित हैं? ❓