भारत में जल्द लॉन्च हो सकती है एलन मस्क की ‘स्टारलिंक’, लेकिन सस्ता नहीं होगा इंटरनेट!
नई दिल्ली: भारत में इंटरनेट क्रांति की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा ‘स्टारलिंक’ जल्द ही लॉन्च हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी को भारतीय अंतरिक्ष नियामक से ग्लोबल मोबाइल व्यक्तिगत संचार लाइसेंस (GMPCS) के लिए आवश्यक नियमों का पालन करने पर सहमति मिल चुकी है। हालांकि, सुरक्षा संबंधी कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी चर्चा जारी है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो भारत में जल्द ही स्पेस-आधारित हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा उपलब्ध हो सकती है।
महंगा होगा स्टारलिंक इंटरनेट!
हालांकि यह तकनीक इंटरनेट सेवा में क्रांति ला सकती है, लेकिन इसकी मूल्य निर्धारण नीति भारतीय ग्राहकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
- मासिक शुल्क: 110 डॉलर (लगभग ₹9,100)
- हार्डवेयर किट (एकमुश्त लागत): 599 डॉलर (लगभग ₹50,000)
- इंस्टॉलेशन चार्ज: अलग से देना होगा
यह कीमतें भारत के आम इंटरनेट यूजर्स के लिए अधिक महंगी साबित हो सकती हैं। फिलहाल, भारत में जियो और एयरटेल जैसी कंपनियां सस्ते ब्रॉडबैंड और 5G सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं, जिससे स्टारलिंक को भारतीय बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल सकती है।
कंपनी ने जमा किए जरूरी दस्तावेज, जल्द मिलेगी मंजूरी
सूत्रों के अनुसार, स्टारलिंक ने भारतीय नियामक एजेंसियों को सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए हैं। यदि सरकार अंतिम मंजूरी प्रदान करती है, तो यह भारत में स्टारलिंक की पहली आधिकारिक मंजूरी होगी, जिससे कंपनी को कॉमर्शियल ब्रॉडबैंड-फ्रॉम-स्पेस सेवाएं शुरू करने की अनुमति मिल जाएगी।
सुरक्षा नियमों पर सरकार का कड़ा रुख
स्टारलिंक को भारत में काम करने के लिए कई सुरक्षा शर्तों का पालन करना होगा। सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि स्टारलिंक को कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEA) से जुड़े कुछ नियमों में छूट दी जाए या नहीं। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए, इसमें किसी भी प्रकार की ढील दिए जाने की संभावना कम है।
- कंपनी को भारत में अपना नेटवर्क कंट्रोल और मॉनिटरिंग सेंटर स्थापित करना होगा।
- स्टारलिंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा अन्य देशों के गेटवे से होकर न गुजरे।
- अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से 10 किमी के दायरे में निगरानी सुविधाएं देना अनिवार्य होगा।
क्या है स्टारलिंक और कैसे करेगा काम?
स्टारलिंक एक सैटेलाइट-बेस्ड इंटरनेट सेवा है, जो बिना किसी फाइबर केबल या मोबाइल टावर के हाई-स्पीड इंटरनेट प्रदान करती है।
- ग्राउंड स्टेशनों से सिग्नल को लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट्स तक भेजा जाता है।
- वहां से यह इंटरनेट सिग्नल सीधे उपयोगकर्ताओं तक पहुंचता है।
- इस तकनीक से दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में भी हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध हो सकता है।
स्टारलिंक का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों तक इंटरनेट पहुंचाना है जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड नेटवर्क पहुंचने में असमर्थ हैं।
भारत में लॉन्चिंग की तैयारी, लेकिन कीमत बनेगी सबसे बड़ी चुनौती
स्टारलिंक की भारत में लॉन्चिंग को लेकर अंतिम चरण की बातचीत जारी है। कंपनी चाहती है कि उसे जल्द से जल्द हरी झंडी मिल जाए, लेकिन भारत में सस्ते इंटरनेट की उपलब्धता के चलते यह सेवा कितनी सफल होगी, यह एक बड़ा सवाल है।
क्या भारतीय ग्राहक महंगा इंटरनेट लेंगे?
भारत में पहले से ही सस्ते इंटरनेट की संस्कृति है। जियो, एयरटेल और बीएसएनएल जैसी कंपनियां बेहद कम कीमत में हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराती हैं। ऐसे में $110 (₹9,100) प्रति माह और $599 (₹50,000) हार्डवेयर किट की लागत अधिकतर भारतीय ग्राहकों के लिए मुश्किल हो सकती है।
अगर सरकार और स्टारलिंक के बीच सहमति बनती है, तो 2025 की शुरुआत तक भारत में यह सेवा शुरू हो सकती है। लेकिन इसकी महंगी कीमतों और सख्त सुरक्षा नियमों के चलते इसका दायरा सीमित रह सकता है।
अब देखना यह होगा कि स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी जगह बना पाती है या फिर जियो और एयरटेल जैसी कंपनियां इसे टक्कर देकर मात देंगी!