युवा शक्ति का संबल: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साहसिक निर्णय और प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता : किशोर भट्ट
उत्तराखंड, जिसे ‘देवभूमि’ के नाम से जाना जाता है, अब युवा आकांक्षाओं और संघर्षों का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। हाल के दिनों में, संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (CGL) में सामने आए नकल प्रकरण ने लाखों युवा बेरोजगारों के दिलों को झकझोर कर रख दिया था। यह केवल एक परीक्षा में धांधली का मामला नहीं था; यह उन सपनों पर सीधा प्रहार था जिन्हें मध्यमवर्गीय परिवारों के युवाओं ने वर्षों की कड़ी मेहनत, त्याग और सीमित संसाधनों के बल पर संजोया था। ऐसे निराशाजनक और आक्रोशपूर्ण माहौल में, प्रदेश के मुख्यसेवक श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने जिस संवेदनशीलता, तत्परता और निर्णायक क्षमता का परिचय दिया है, वह न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि युवा शक्ति के प्रति उनके गहरे सम्मान को भी प्रदर्शित करता है।
युवा बेरोजगारों की सामूहिक मांग के अनुरूप, आज श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने जिस त्वरित और साहसिक निर्णय की घोषणा की, वह वास्तव में सराहनीय है: संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द करना और यह सुनिश्चित करना कि इस परीक्षा का पुनः आयोजन अगले तीन महीने के भीतर किया जाए। यह निर्णय लाखों युवाओं के लिए राहत की साँस लेकर आया है, जिन्होंने अपनी रातें किताबों के साथ गुजारी थीं और जिनके माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो चुकी थीं। मुख्यमंत्री जी ने इस बात को भली-भाँति समझा कि जब परीक्षा की शुचिता ही संदिग्ध हो जाए, तो उसके परिणामों का कोई औचित्य नहीं रह जाता। एक पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था बहाल करना उनकी नैतिक जिम्मेदारी थी, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया।
इससे पूर्व भी, युवाओं की आवाज को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, माननीय मुख्यसेवक जी ने इस गंभीर नकल प्रकरण की केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जाँच की संस्तुति की थी। यह अपने आप में एक बड़ा कदम था, जो यह दर्शाता है कि सरकार इस मामले की तह तक जाने और इसमें शामिल हर बड़े-छोटे अपराधी को बेनकाब करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही, मामले की त्वरित और गहन जाँच के लिए गठित विशेष जाँच दल (SIT) ने भी तत्परता से अपनी रिपोर्ट माननीय मुख्यसेवक जी को सौंप दी है, जिसने त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया को गति दी। इस प्रकार, धामी सरकार ने जाँच के दोहरे मापदंड स्थापित किए—एक ओर सीबीआई से विस्तृत और निष्पक्ष जाँच, तो दूसरी ओर एसआईटी से त्वरित एक्शन और रिपोर्टिंग।
आज, जब हम प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता को दूषित करने का प्रयास करने वाले अपराधी तत्वों पर होने वाली कार्रवाई को देखते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि धामी सरकार की मंशा कितनी दृढ़ है। ‘नकल विरोधी कानून’ के तहत इन तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है, जिससे भविष्य में ऐसी आपराधिक हिम्मत करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश जाए। युवाओं के सरकारी नौकरी पाने के सपने को सुरक्षित रखना और प्रतियोगी परीक्षाओं का निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ आयोजन सुनिश्चित करना श्री पुष्कर सिंह धामी जी की सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धि और प्रतिबद्धता रही है। यह केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि नैतिक और भावनात्मक समर्थन है।
प्रतियोगी परीक्षा में नकल की कोशिश कर इसकी शुचिता भंग करने का प्रयास अपराधियों द्वारा लाखों युवा बेरोजगारों के सपनों को ठेस पहुँचाने वाला कृत्य था। यह उन युवाओं के लिए अत्यंत मुश्किल समय था, जिन्होंने अपनी तैयारी में वर्षों और बहुमूल्य पारिवारिक संसाधनों को खर्च किया था। आक्रोशित और निराश युवा जब सड़कों पर उतरे और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी, तो एक असाधारण घटनाक्रम देखने को मिला। पहली बार ऐसा हुआ कि प्रदेश के किसी मुख्यमंत्री ने सारा सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़कर प्रदर्शन कर रहे युवा बेरोजगारों के बीच पहुँचे। उन्होंने युवाओं से सीधे संवाद किया, उनकी पीड़ा को सुना और उनकी मुख्य मांग के अनुसार सीबीआई जाँच की घोषणा की। यह पहल जनता और सरकार के बीच एक अभूतपूर्व सेतु का निर्माण करती है।
इसके बाद, सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर युवाओं की ओर से परीक्षा को पूरी तरह से रद्द किए जाने की प्रबल मांग उठने लगी। मुख्यमंत्री जी ने एक बार फिर युवा शक्ति के सामने नतमस्तक होते हुए और उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए, परीक्षा रद करने का ऐतिहासिक फैसला लिया। लेकिन उनका दायित्व यहीं समाप्त नहीं हुआ। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि योग्य युवाओं को उनका हक समय से मिले, जिसके लिए आयोग को तीन महीने के भीतर यह परीक्षा दोबारा आयोजित करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। यह त्वरित पुनर्आयोजन का निर्देश मुख्यमंत्री जी की इस बात के प्रति गंभीरता को दर्शाता है कि युवाओं का समय बर्बाद न हो और उनके सपने जल्द पूरे हों।
हमें याद है, राज्य के इतिहास में एक ऐसा दौर भी था जब सरकारों और मुख्यमंत्रियों पर ‘नौकरी बेचने’ के गंभीर आरोप खुलेआम लगे थे। तब जाँच की पुरजोर मांग हुई, पर तत्कालीन सरकारों ने सारी मांगों को अनसुना कर युवाओं के हक पर डकैती डालने का काम किया था। उस निराशाजनक अतीत के विपरीत, आज का दृश्य एक सुखद बदलाव का परिचायक है।
श्री पुष्कर सिंह धामी जी में एक ऐसा सौम्य हृदय का मुखिया दिखाई देता है जो युवाओं की हर मांग के सामने नतमस्तक होता है, युवा शक्ति का सम्मान करता है और उनकी आकांक्षाओं को अपनी प्राथमिकता बनाता है। उत्तराखंड, जो अब एक युवा हो चुका प्रदेश है, में युवाओं की सुध लेने वाले, उनके भविष्य की चिंता करने वाले और उनके संघर्षों को अपनी जिम्मेदारी समझने वाले माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी को हृदय की गहराइयों से धन्यवाद। हमें गर्व है कि आप हमारे मुख्यमंत्री हैं—युवाओं के सपनों के सजग प्रहरी और प्रदेश के भविष्य के निर्माता। उनका यह निर्णायक नेतृत्व उत्तराखंड के लाखों युवा बेरोजगारों के लिए एक नया सवेरा लेकर आया है।