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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया ‘भूले बिसरे मतवाले’ पुस्तक का विमोचन,

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देहरादून, 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 1मार्च को  मुख्यमंत्री आवास में वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी जय प्रकाश पांडेय द्वारा लिखित प्रथम कहानी संग्रह ‘भूले बिसरे मतवाले’ का विमोचन किया था। प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अनसुने और गुमनाम नायकों के संघर्ष और बलिदान को केंद्र में रखकर लिखी गई है।

इस अवसर पर राज्य के कई प्रतिष्ठित साहित्यकार, शिक्षाविद, समाजसेवी और राजनीतिक हस्तियां उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री ने पुस्तक की सराहना करते हुए इसे ऐतिहासिक महत्व का दस्तावेज और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया।


मुख्यमंत्री ने पुस्तक को बताया प्रेरणादायक और ऐतिहासिक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘भूले बिसरे मतवाले’ की सराहना करते हुए कहा कि यह संग्रह उन वीर नायकों को श्रद्धांजलि देता है, जिनके बलिदान को इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा,

“हमारे देश की आज़ादी के संघर्ष में हजारों ऐसे वीर सेनानी थे, जिन्होंने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया, लेकिन इतिहास के पन्नों में उनकी चर्चा उतनी नहीं हुई, जितनी होनी चाहिए थी। जय प्रकाश पांडेय जी ने अपनी लेखनी के माध्यम से इन गुमनाम योद्धाओं की गाथा को जीवंत किया है, जो निश्चित रूप से नई पीढ़ी को प्रेरित करेगी और उनके मन में राष्ट्रभक्ति की भावना को प्रबल करेगी।”

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह पुस्तक ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के उपलक्ष्य में एक महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने उत्तराखंड के स्कूलों और पुस्तकालयों में इसे उपलब्ध कराने पर विचार करने की बात कही, ताकि युवा पीढ़ी देश के इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्षों से अवगत हो सके।


दीप्ति रावत भारद्वाज ने की पुस्तक की सराहना

इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महासचिव दीप्ति रावत भारद्वाज ने भी पुस्तक की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कहानी संग्रह युवा पीढ़ी के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक है।

“वर्तमान समय में जब हमारा समाज आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, तब हमें अपने इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्षों से जुड़ने की सबसे अधिक आवश्यकता है। यह पुस्तक हमें हमारे अतीत से जोड़ती है और हमें उन वीरों के संघर्षों को समझने का अवसर देती है, जिन्होंने हमारे देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए।”

उन्होंने युवाओं से इस पुस्तक को पढ़ने और स्वतंत्रता संग्राम के अनसुने नायकों के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।


लेखक जय प्रकाश पांडेय का परिचय

इस ऐतिहासिक पुस्तक के लेखक जय प्रकाश पांडेय वर्तमान में ओएनजीसी मुख्यालय, देहरादून में वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एमफिल और एलएलबी की डिग्री प्राप्त की है।

पिथौरागढ़ के विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद, उन्होंने राजभाषा और प्रशासनिक क्षेत्रों में पिछले 10 वर्षों से उत्कृष्ट सेवाएं दी हैं।

जय प्रकाश पांडेय साहित्य और इतिहास के गहरे अध्ययन में रुचि रखते हैं और स्वतंत्रता संग्राम पर केंद्रित यह पुस्तक उनकी इसी रुचि का प्रमाण है। उनके लेख नियमित रूप से देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा,

“यह पुस्तक मेरी वर्षों की मेहनत और ऐतिहासिक दस्तावेजों के गहन अध्ययन का परिणाम है। हमारा कर्तव्य है कि हम उन वीरों को याद करें, जिन्होंने हमारे देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया और अपने प्राण न्योछावर कर दिए। ‘भूले बिसरे मतवाले’ उन्हीं महान आत्माओं को समर्पित है।”


गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में उत्तराखंड और देहरादून के कई प्रतिष्ठित साहित्यकार, शिक्षाविद, समाजसेवी और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें शामिल हैं:

  • प्रो. दिनेश चमोला – वरिष्ठ साहित्यकार एवं उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष
  • असीम कुमार सिन्हा – ओएनजीसी के सेवानिवृत्त मुख्य महाप्रबंधक
  • डॉ. जिज्ञासा पांडेय – प्रसिद्ध चिकित्सक
  • अंकुर रावत – गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष
  • भूपेंद्र बसेड़ा – वरिष्ठ समाजसेवी एवं सांस्कृतिक कर्मी

युवाओं को प्रेरणा देने वाली पुस्तक

‘भूले बिसरे मतवाले’ केवल एक ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं, बल्कि युवाओं को प्रेरित करने वाली एक जीवंत कथा है। इसमें उन स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की कहानियां शामिल हैं, जिन्हें मुख्यधारा के इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया।

यह पुस्तक देशभक्ति की भावना को प्रबल करने और पाठकों को अपने राष्ट्र के गौरवशाली अतीत से जोड़ने का कार्य करेगी।


पुस्तक पढ़ने की अपील

इस ऐतिहासिक अवसर पर सभी अतिथियों ने इस पुस्तक को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और पढ़ने की अपील की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विशेष रूप से शिक्षण संस्थानों, पुस्तकालयों और शोधकर्ताओं को इस पुस्तक को पढ़ने की सलाह दी, ताकि वे स्वतंत्रता संग्राम के उन अनसुने नायकों की गाथा से प्रेरित हो सकें।

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