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मुंबई के अंजुरदिवे-भिवंडी में बागेश्वर धाम का दिव्य आयोजन: वरिष्ठ भाजपा नेता विक्रांत भदौरिया ने की भागीदारी, धीरेंद्र शास्त्री से लिया आशीर्वाद

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मुंबई, भिवंडी। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंतर्गत आने वाले अंजुरदिवे, भिवंडी क्षेत्र में इस सप्ताह एक ऐतिहासिक और अत्यंत आध्यात्मिक आयोजन देखने को मिला। यहां ‘श्री बागेश्वर बालाजी प्राण-प्रतिष्ठा समारोह’ के अंतर्गत सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से हजारों श्रद्धालु, संतजन, और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित हुए। आयोजन के मुख्य आकर्षण रहे बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पूज्य श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिनके दिव्य वचनों और कथाओं ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया।

पूरे आयोजन स्थल को वैदिक मंत्रों, भगवती ध्वजों, और रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया था। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच भी व्यवस्था बेहद सुव्यवस्थित रही। कार्यक्रम में देशभर से विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक व आध्यात्मिक क्षेत्र की हस्तियों ने भाग लिया, जिनमें भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री विक्रांत भदौरिया भी उपस्थित रहे।

आध्यात्मिकता से ओतप्रोत आयोजन

‘प्राण-प्रतिष्ठा’ का यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि यह देश की सनातन संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत उदाहरण बन गया। कार्यक्रम में गीता, भागवत और रामचरितमानस के श्लोकों की गूंज के साथ धीरेंद्र शास्त्री जी ने श्रद्धालुओं को जीवन की दिशा, धर्म की महिमा और सेवा की भावना का गहन संदेश दिया।

धीरेंद्र शास्त्री जी ने अपने प्रवचन में कहा, “जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब ईश्वर किसी रूप में प्रकट होकर मानवता को दिशा दिखाता है। बागेश्वर धाम केवल एक स्थान नहीं, एक विचारधारा है – जो भारत के युवाओं को धर्म, संस्कृति और राष्ट्रसेवा से जोड़ती है।”

विक्रांत भदौरिया ने जताई श्रद्धा

इस आयोजन में उपस्थित भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री विक्रांत भदौरिया ने श्री बागेश्वर बालाजी के चरणों में नमन कर पूज्य धीरेंद्र शास्त्री जी का आशीर्वाद लिया। उन्होंने आयोजन के बाद मीडिया से बातचीत में कहा:

**”बागेश्वर धाम सरकार के श्रीचरणों में आकर जो शांति, शक्ति और श्रद्धा की अनुभूति होती है, उसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। पूज्य धीरेंद्र शास्त्री जी के श्रीमुख से निकली श्रीमद्भागवत कथा ने अंतर्मन को छू लिया। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्र के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है।

आज जब समाज विभिन्न प्रकार की चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे समय में बागेश्वर धाम जैसे आध्यात्मिक केंद्र युवाओं को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे पूज्य शास्त्री जी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ और इस आयोजन का साक्षी बनने का अवसर मिला। मैं सभी से आग्रह करता हूं कि धर्म, सेवा और संस्कृति के इस यज्ञ में भाग लें और जीवन को नई ऊर्जा दें।”**

हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति

भिवंडी के अंजुरदिवे में आयोजित इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र सहित उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, छत्तीसगढ़ और बिहार जैसे राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे। आयोजन स्थल पर रोज़ाना हजारों की संख्या में लोग कथा श्रवण हेतु उपस्थित होते रहे। भक्तों के लिए भोजन प्रसाद, मेडिकल सुविधाएं, जल सेवा और रात्रि विश्राम की विशेष व्यवस्था की गई थी।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों की भूमिका

इस आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय समाजसेवियों और भाजपा कार्यकर्ताओं की भी अहम भूमिका रही। भिवंडी क्षेत्र के पार्षद, नगरसेवक, और सामाजिक संगठनों ने आयोजन में तन-मन-धन से योगदान दिया। आयोजन समिति ने बताया कि यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र के युवाओं को नशामुक्ति, शिक्षा और संस्कृति की ओर प्रेरित करने का भी माध्यम है।

मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर बड़ी कवरेज

श्रीमद्भागवत कथा और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को यूट्यूब, फेसबुक, और इंस्टाग्राम जैसे डिजिटल माध्यमों पर लाखों लोगों ने लाइव देखा। बागेश्वर धाम सरकार के सोशल मीडिया पेजों पर हर दिन की झलकियों को साझा किया गया, जिसे देशभर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलीं।

आयोजन के पीछे की भावना

इस आयोजन का मूल उद्देश्य केवल मंदिर निर्माण या धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं था। इसका प्रमुख उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना का जागरण, सदाचार का प्रचार, और सनातन संस्कृति के पुनरुत्थान को बल देना है। पूज्य धीरेंद्र शास्त्री जी के मार्गदर्शन में यह आयोजन लोगों के हृदय को धर्म, सेवा और राष्ट्रप्रेम से भरने में सफल रहा।

 

भिवंडी का यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक महायात्रा थी जिसमें भक्ति, सेवा, संगठन और श्रद्धा का समागम हुआ। वरिष्ठ भाजपा नेता विक्रांत भदौरिया की भागीदारी और पूज्य धीरेंद्र शास्त्री जी का सान्निध्य इस आयोजन को और भी गौरवशाली बना गया।

यह कार्यक्रम यह सिद्ध करता है कि भारत की आत्मा आज भी जीवित है — और जब धर्म, संस्कृति और राष्ट्र एक साथ चलते हैं, तब भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर होता है।

 

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