अनिल बलूनी ने कण्वाश्रम, वीर गूल, तीलू रौतेली स्मारक और गोपीनाथ मंदिर को लेकर उठाई अहम माँगें
नई दिल्ली। गढ़वाल लोकसभा सांसद अनिल बलूनी ने आज केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात कर उत्तराखंड की लोक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण व संवर्धन को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। बलूनी ने स्पष्ट कहा कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सहेजने के लिए केंद्र सरकार का सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
इस दौरान उन्होंने कोटद्वार स्थित प्रसिद्ध कण्वाश्रम को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर लाने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी इस विषय में पत्राचार हो चुका है। मंत्री ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए आश्वस्त किया कि जल्द ही पुरातत्व विभाग की एक उच्चस्तरीय टीम कण्वाश्रम का निरीक्षण करेगी और वहां विकास, सुरक्षा और संरक्षण की संभावनाओं का मूल्यांकन किया जाएगा।
बलूनी ने मलेथा स्थित वीर माधो सिंह भंडारी द्वारा निर्मित ऐतिहासिक गूल (नहर) को पुरातत्व महत्त्व का दर्जा देने की मांग की। उन्होंने इसे उत्तराखंड की वीरता और पारंपरिक जल प्रबंधन का प्रतीक बताते हुए इसके संरक्षण और रखरखाव के लिए केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
वीरांगना तीलू रौतेली से जुड़े स्मारकों की उपेक्षा की ओर इशारा करते हुए बलूनी ने उनके समुचित संरक्षण की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि ऐसे लोक नायकों की स्मृति को संरक्षित कर नई पीढ़ियों को प्रेरित किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त बलूनी ने चमोली जिले के गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर के आसपास रहने वाले स्थानीय निवासियों को भवन निर्माण में आ रही दिक्कतों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मंत्री से अनुरोध किया कि मंदिर की गरिमा व संरक्षण को बरकरार रखते हुए स्थानीय लोगों को भवन निर्माण के लिए नियमों में शिथिलता दी जाए।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सभी प्रस्तावों को गंभीरता से सुनते हुए उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र के सभी महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों की स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।