एसिड अटैक पीड़ितों को नौकरी या गुजारा भत्ता मिले: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को 6 महीने में नीति बनाने का आदेश
नई दिल्ली: Supreme Court of India ने एसिड अटैक पीड़ितों के अधिकारों को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए केंद्र और सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे 6 महीने के भीतर एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए नौकरी में आरक्षण या मासिक गुजारा भत्ता देने की स्पष्ट नीति तैयार करें। अदालत ने कहा कि पीड़ितों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आया जिसमें प्रसिद्ध एसिड अटैक सर्वाइवर और सामाजिक कार्यकर्ता Laxmi Agarwal सहित अन्य पीड़ितों ने सरकार से रोजगार, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा की मांग की थी।
अदालत की सख्त टिप्पणी
जस्टिस B. V. Nagarathna और जस्टिस Satish Chandra Sharma की बेंच ने कहा कि एसिड अटैक पीड़ितों को सिर्फ मुआवजा या चिकित्सा सहायता देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें आजीविका का स्थायी स्रोत भी मिलना चाहिए ताकि वे सम्मान के साथ जीवन जी सकें।
अदालत ने यह भी पूछा कि एसिड अटैक पीड़ितों को अभी तक पूर्ण रूप से दिव्यांगता की श्रेणी में क्यों नहीं लाया गया, जबकि कई मामलों में पीड़ित स्थायी रूप से शारीरिक और मानसिक रूप से प्रभावित हो जाते हैं।
मौजूदा मुआवजा पर्याप्त नहीं
केंद्र सरकार की ओर से एसिड अटैक पीड़ितों को 3 से 8 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाता है। अदालत ने इसे एकमुश्त सहायता बताते हुए कहा कि यह लंबे समय तक जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं है।
अदालत के मुख्य निर्देश
केंद्र सरकार को 6 महीने के भीतर राष्ट्रीय नीति तैयार करने का आदेश।
राज्य सरकारें भी अपनी-अपनी रोजगार या मासिक भत्ता योजना बनाएंगी।
पीड़ितों को ₹10,000 से ₹20,000 तक मासिक गुजारा भत्ता देने पर विचार।
एसिड अटैक सर्वाइवर्स को Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 के तहत लाभ देने की संभावना पर भी चर्चा।
एसिड बिक्री पर सख्त नियंत्रण और अपराधियों के खिलाफ कड़ी सजा की जरूरत पर भी अदालत ने सवाल उठाए।
पीड़ितों की प्रतिक्रिया
एसिड अटैक सर्वाइवर और एक्टिविस्ट Laxmi Agarwal ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह पीड़ितों के लिए नई उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अब एसिड अटैक सर्वाइवर्स को केवल सहानुभूति नहीं बल्कि सम्मानजनक जीवन का अधिकार मिलना चाहिए।
आगे क्या होगा
अदालत ने केंद्र और राज्यों को छह महीने में नीति बनाकर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इस दौरान सरकारों को रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और पुनर्वास के ठोस उपाय तय करने होंगे। अदालत ने यह मामला छह महीने बाद फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला एसिड अटैक पीड़ितों के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।