TheBharatPulse

निष्पक्ष, निर्भीक, जनहितकारी (नई दिल्ली)

प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा ने लिखी थी संविधान की मूल हस्तलिपि

Read Time:7 Minute, 41 Second

भारतीय संविधान की पहली छपी हुई प्रति देहरादून में हुई थी प्रकाशित, प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा ने लिखी थी हस्तलिखित मूल प्रति

भारत का संविधान, जिसे दुनिया का सबसे विस्तृत और समावेशी लोकतांत्रिक दस्तावेज माना जाता है, उसकी पहली मुद्रित (प्रिंटेड) प्रति उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में प्रकाशित की गई थी। वहीं, इसकी मूल हस्तलिखित प्रति महान सुलेखक प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा द्वारा लिखी गई थी। यह ऐतिहासिक तथ्य उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है कि भारतीय संविधान, जिसने स्वतंत्र भारत के प्रशासन की नींव रखी, उसकी छपाई देहरादून स्थित सर्वे ऑफ इंडिया प्रेस में की गई थी।

 

संविधान निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

 

भारतीय संविधान को तैयार करने की प्रक्रिया 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद शुरू हुई थी। संविधान सभा का गठन किया गया, जिसमें डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने प्रमुख भूमिका निभाई। संविधान का मसौदा तैयार होने के बाद उसे एक विशिष्ट रूप देने की जिम्मेदारी एक कुशल सुलेखक को सौंपी गई। इसके लिए चुना गया नाम था प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा।

 

रायज़ादा ने इटालिक स्टाइल में अंग्रेजी भाषा में संविधान की पूरी मूल प्रति अपने हाथों से लिखी। उन्होंने इस कार्य में अपनी अत्यंत सुंदर हस्तलिपि का उपयोग किया, जिससे संविधान का स्वरूप और भी आकर्षक बन गया।

 

कैसे हुई संविधान की छपाई?

 

संविधान की लिखावट पूरी होने के बाद इसे देहरादून के सर्वे ऑफ इंडिया प्रेस में मुद्रित किया गया। यह प्रेस उस समय देश के प्रमुख मुद्रण केंद्रों में से एक था और संवैधानिक दस्तावेजों के मुद्रण के लिए पूरी तरह सक्षम था।

 

संविधान की छपाई में उच्च गुणवत्ता वाले कागज का उपयोग किया गया, जिसे विशेष रूप से तैयार किया गया था। मुद्रण की प्रक्रिया अत्यंत गोपनीय रखी गई थी, ताकि संविधान के अंतिम स्वरूप में कोई छेड़छाड़ न हो सके।

 

प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा का योगदान

 

रायज़ादा, जो पेशे से एक प्रसिद्ध सुलेखक (Calligrapher) थे, ने यह ऐतिहासिक कार्य बिना किसी पारिश्रमिक के किया। उन्होंने सिर्फ एक अनुरोध किया कि उन्हें प्रत्येक पृष्ठ पर अपना नाम लिखने का अवसर मिले। यह अनुरोध स्वीकार किया गया और आज भी भारतीय संसद पुस्तकालय में संविधान की मूल हस्तलिखित प्रति में उनके हस्ताक्षर दर्ज हैं।

 

संविधान लिखने के दौरान सभी पृष्ठों को सोने और प्लेटिनम की परतों से सजाया गया था। इसके अतिरिक्त, इसमें नंदलाल बोस और उनके शिष्यों द्वारा बनाई गई खूबसूरत कलाकृतियाँ भी जोड़ी गईं, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती हैं।

 

देहरादून का ऐतिहासिक महत्व

 

भारतीय संविधान की पहली मुद्रित प्रति का देहरादून में छपना उत्तराखंड के इतिहास के लिए गौरव का विषय है। सर्वे ऑफ इंडिया प्रेस, जो देहरादून में स्थित है, उस समय एक प्रमुख सरकारी मुद्रण केंद्र था। इसी प्रेस में संविधान की पहली छपी हुई प्रति तैयार की गई, जिसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया।

 

संविधान निर्माण से जुड़े इस महत्वपूर्ण कार्य में देहरादून की भूमिका को कम आंका नहीं जा सकता। यह शहर संविधान के पहले मुद्रण का गवाह बना और इसने भारतीय लोकतंत्र की नींव रखने में अपना अनूठा योगदान दिया।

 

संविधान की मूल प्रति आज भी सुरक्षित

 

भारतीय संविधान की मूल हस्तलिखित प्रति को आज भी नई दिल्ली स्थित संसद भवन के पुस्तकालय और राष्ट्रीय संग्रहालय (National Museum) में सुरक्षित रखा गया है। इसे विशेष देखरेख में रखा जाता है और आम जनता को दिखाने के लिए सीमित अवसरों पर प्रदर्शित किया जाता है।

 

भारत के संवैधानिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय

 

संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र, स्वतंत्रता, समानता और न्याय के मूल्यों का प्रतिबिंब है। प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा और देहरादून का योगदान इस ऐतिहासिक यात्रा का अभिन्न हिस्सा है, जिसे देश हमेशा याद रखेगा।

 

“संविधान निर्माण में योगदान देने वाले प्रत्येक व्यक्ति का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है, क्योंकि उनके प्रयासों की बदौलत ही आज भारत एक सशक्त लोकतांत्रिक राष्ट्र बना है।”

 

महत्वपूर्ण तथ्य:

 

✅ संविधान की पहली छपी हुई प्रति देहरादून स्थित सर्वे ऑफ इंडिया प्रेस में प्रकाशित हुई।

✅ मूल हस्तलिखित प्रति प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा द्वारा लिखी गई थी।

✅ रायज़ादा ने इस कार्य के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लिया, बल्कि प्रत्येक पृष्ठ पर अपना नाम अंकित करने की अनुमति मांगी।

✅ संविधान को विशेष प्रकार के कागज पर सोने और प्लेटिनम की सजावट के साथ लिखा गया।

✅ मूल प्रति आज भी संसद भवन के पुस्तकालय और राष्ट्रीय संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई है।

 

भारतीय संविधान की यह गौरवशाली यात्रा देश की लोकतांत्रिक आत्मा को जीवंत करती है और देहरादून के ऐतिहासिक योगदान को विशेष पहचान दिलाती है।

 

— The Bharat Pulse

 

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.