WhatsApp का बड़ा अपडेट: अब 13 साल से कम उम्र के बच्चे भी चला सकेंगे ऐप, पैरेंट्स के पास रहेगा पूरा कंट्रोल
सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंताओं के बीच Meta Platforms के स्वामित्व वाले WhatsApp ने बड़ा कदम उठाया है।
11 मार्च 2026 को लॉन्च किए गए नए फीचर ‘Parent-Managed Accounts’ के तहत अब 13 साल से कम उम्र के बच्चे भी आधिकारिक रूप से व्हाट्सऐप का इस्तेमाल कर सकेंगे। हालांकि, उनकी हर गतिविधि पर माता-पिता की निगरानी रहेगी।
🔍 कैसे काम करेगा नया फीचर?
व्हाट्सऐप ने बच्चों के लिए ‘Guardian Oversight’ सिस्टम लागू किया है, जिसमें:
- लिंक्ड अकाउंट सिस्टम:
बच्चे का अकाउंट सीधे माता-पिता के अकाउंट से जुड़ा होगा। - Parental PIN सुरक्षा:
प्राइवेसी सेटिंग्स बदलने के लिए 6 अंकों का पिन जरूरी होगा, जो केवल माता-पिता के पास रहेगा। - कॉन्टैक्ट कंट्रोल:
बच्चा खुद से किसी को ऐड नहीं कर पाएगा—किससे चैट करनी है, यह पैरेंट्स तय करेंगे।
🚫 बच्चों के लिए क्या रहेगा प्रतिबंधित?
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई फीचर्स सीमित किए गए हैं:
- Status और Channels नहीं:
बच्चे स्टेटस देख या पोस्ट नहीं कर पाएंगे और चैनल्स भी एक्सेस नहीं होंगे। - Meta AI बंद रहेगा:
AI आधारित फीचर्स बच्चों के लिए उपलब्ध नहीं होंगे। - Disappearing Messages नहीं:
चैट हिस्ट्री सुरक्षित रहेगी ताकि जरूरत पड़ने पर पैरेंट्स देख सकें। - कोई विज्ञापन नहीं:
बच्चों के अकाउंट पूरी तरह एड-फ्री रहेंगे।
⚙️ सेटअप कैसे करें?
- बच्चे के फोन में लेटेस्ट WhatsApp इंस्टॉल करें
- ‘More Options’ में जाकर Parent-Managed Account चुनें
- बच्चे की जन्मतिथि डालें
- पैरेंट्स अपने फोन से QR कोड स्कैन करें
- 6 अंकों का Parental PIN सेट करें
🔐 प्राइवेसी पर क्या असर?
कंपनी के अनुसार, सभी चैट और कॉल्स End-to-End Encryption से सुरक्षित रहेंगी।
- WhatsApp खुद भी मैसेज नहीं पढ़ सकेगा
- अनजान नंबरों के मैसेज ‘Request’ फोल्डर में जाएंगे
- पैरेंट्स की मंजूरी के बिना बच्चा उन्हें एक्सेस नहीं कर पाएगा
🧠 विशेषज्ञों की राय:
टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चों को पूरी तरह सोशल मीडिया से दूर रखने के बजाय उन्हें निगरानी में सुरक्षित उपयोग सिखाना ज्यादा बेहतर विकल्प है।
WhatsApp का यह नया फीचर बच्चों की डिजिटल सुरक्षा और पैरेंट्स की चिंता दोनों को संतुलित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह फीचर डिजिटल पेरेंटिंग का नया ट्रेंड बन सकता है।