वाराणसी में हुई मध्य क्षेत्रीय परिषद की 25वीं बैठक, उत्तराखंड से जुड़े अहम मुद्दों को प्रमुखता से रखा गया
वाराणसी। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में वाराणसी में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 25वीं बैठक का आयोजन किया गया। इस उच्चस्तरीय बैठक में उत्तराखंड सहित मध्य क्षेत्र के राज्यों – उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड – के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में उत्तराखंड की ओर से राज्य की विशेष आवश्यकताओं और संवेदनशील भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव एवं प्रस्ताव केंद्र सरकार के समक्ष रखे गए।
उत्तराखंड प्रतिनिधिमंडल ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, संचार और सुरक्षा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) के माध्यम से और अधिक सहयोग की मांग की। वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत सीमांत गांवों में अवस्थापना विकास, भारत नेट और सैटेलाइट संचार सेवाओं के शीघ्र विस्तार पर भी जोर दिया गया।
इसके साथ ही, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अनुदान प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाने का सुझाव दिया गया। राज्य की भौगोलिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए 1989 की दूरस्थ घाटी अधिसूचना को निरस्त करने की आवश्यकता भी बैठक में रखी गई।
मानसून के दौरान उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, अतिवृष्टि और बादल फटने जैसी आपदाओं के कारण सड़क मार्गों को होने वाली क्षति के मद्देनजर प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत राज्य को अतिरिक्त सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया गया। इसके अलावा राज्य में ग्लेशियर अध्ययन केंद्र, जैव विविधता संरक्षण संस्थान तथा अंतरराष्ट्रीय साहसिक खेल प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना का भी प्रस्ताव बैठक में प्रस्तुत किया गया।
उत्तराखंड की सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2026 में प्रस्तावित नंदा राजजात यात्रा तथा 2027 के हरिद्वार कुंभ मेले के सफल आयोजन के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का अनुरोध किया गया।

बैठक में यह भी दोहराया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को साकार करने की दिशा में उत्तराखंड सरकार पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। प्रदेश को विकसित उत्तराखंड के रूप में स्थापित करने हेतु राज्य सरकार तीव्र गति से योजनाओं और परियोजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है, ताकि हर नागरिक विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके और ‘विकसित भारत’ के निर्माण में सक्रिय भागीदार बन सके।