उत्तराखंड में अब बाहरी वाहनों को देना होगा ‘ग्रीन सेस’, प्रदूषण नियंत्रण के लिए धामी सरकार का बड़ा कदम
देहरादून: राज्य स्थापना के 25 साल पूरे होने के मौके पर उत्तराखंड परिवहन विभाग ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी ‘ग्रीन सेस’ (Green Cess) वसूला जाएगा। यह सेस न केवल कमर्शियल बल्कि बाहरी राज्यों से आने वाली निजी गाड़ियों पर भी लागू होगा, जो कि राज्य में पहली बार हो रहा है।
ऑटोमैटिक वसूली, 24 घंटे की वैधता
परिवहन विभाग ने इसके लिए एक निजी कंपनी के साथ करार किया है और पूरे राज्य में 15 ऑटोमैटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए गए हैं। आरटीओ देहरादून संदीप सैनी के अनुसार:
* फास्टैग (FASTag) स्कैन होते ही सेस की राशि स्वचालित रूप से कट जाएगी।
* यह टैक्स केवल 24 घंटे के लिए वैध होगा।
* ग्रीन सेस की कमाई का उपयोग प्रदूषण नियंत्रण, सड़क सुरक्षा और शहरी परिवहन के सुधार में किया जाएगा।
* यह नियम नवंबर से प्रदेश में लागू होने की संभावना है।
किसे कितनी छूट और कितनी राशि? (ग्रीन सेस दरें)
धामी सरकार के इस कदम का उद्देश्य राज्य की बिगड़ती वायु गुणवत्ता को सुधारना और इलेक्ट्रिक तथा CNG जैसे ग्रीन फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देना है।
| वाहन का प्रकार | ग्रीन सेस राशि |
|—|—|
| दोपहिया, इलेक्ट्रिक और CNG वाहन | छूट |
| थ्री व्हीलर | 20 रुपए |
| कार | 40 रुपए |
| मीडियम कमर्शियल वाहन | 60 रुपए |
| हैवी कमर्शियल वाहन | 80 रुपए |
| एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड | छूट |
विशेषज्ञों की राय
ट्रांसपोर्ट विशेषज्ञ विजय वर्धन डंडरियाल ने इस पहल के मकसद को अच्छा बताया, लेकिन साथ ही सवाल भी उठाया। उनका कहना है, “ग्रीन सेस का मकसद अच्छा है, लेकिन पहले से वसूले जा रहे एंट्री सेस के पैसे का उपयोग कितना पारदर्शी है, यह भी जनता को बताया जाना चाहिए।”
धामी सरकार की मंशा साफ
यह नई टैक्स नीति उत्तराखंड में स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। अब हर बाहरी वाहन को उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करते ही यह टैक्स देना होगा, जिससे प्रदूषण कम करने और हरित परिवहन को प्रोत्साहित करने की सरकार की मंशा स्पष्ट होती है।